मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक को उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना के मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया.

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गुरुवार, 14 मई को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच के सामने बीजेपी विधायक पाठक पेश हुए. वकील ने विधायक के व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए 15 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट देने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने याचिका खारिज कर दी.

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न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने का आरोप

कटनी के आशुतोष दीक्षित ने एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने पिछले साल सितंबर में पाठक से जुड़ी एक कंपनी से जुड़े कथित अवैध खनन के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.

अपने आदेश में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की. जस्टिस मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मामले से खुद को अलग कर लिया और निर्देश दिया कि इस मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए. याचिका में कहा गया है कि विधायक के आचरण ने न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल किया है और न्यायिक कार्य में उनका हस्तक्षेप आपराधिक अवमानना के समान है.

संजय पाठक बिना शर्त माफी मांगी थी

हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल को बीजेपी विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही दर्ज करने का निर्देश दिया था. इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान पाठक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए हलफनामा दाखिल किया था और बिना शर्त माफी मांगी थी.

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