रांची में छात्रों और सरकार के बीच तीसरे दौर की बैठक रविवार (9 अगस्त) को करीब पांच घंटे चली. छात्र डेलिगेशन ने कहा कि हमारी 50 फीसदी से अधिक मांगों पर बात बन गई है. 14वीं JPSC और JPSC बैकलॉक 2023 और 25 रद्द करने के लिए सरकार सहमत है. इसके साथ ही JPSC रिफॉर्म पर बात बनी है. डेलिगेशन ने कहा कि CGL पर सहमति नहीं बनी है. TDPL द्वारा ली गई परीक्षा रद्द करने पर भी सहमति नहीं बन पाई.
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
सरकार के बातचीत के बाद छात्र नेता कुणाल ने कहा, "विधानसभा घेराव शांतिपूर्ण तरीके से होगा. हमारी मांग है कि सीबीआई से जांच हो, हम इससे समझौता नहीं करेंगे." बता दें कि छात्रों ने सोमवार (10 अगस्त) को विधानसभा घेराव का ऐलान किया था.
छात्र और सरकार में समझौते की मुख्य बातें
- ACF परीक्षा रद्द होगी
- 14वीं JPSC PT (रेगुलर एवं बैकलॉग) परीक्षा रद्द होगी
- JPSC CGL परीक्षा रद्द नहीं होगी
- FRO परीक्षा की जांच होगी, जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर परीक्षा रद्द की जाएगी
- TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच होगी, गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित परीक्षा को रद्द किया जाएगा
- परीक्षा सुधीर की मांग को सरकार ने माना
- JPSC JSSC में रिफॉर्म के लिए कमेटी बनेगी
- परीक्षा धांधली की CID जांच होगी
- CID जांच के दौरान यदि वित्तीय घोटाले से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो उसकी जांच ED से कराने के लिए सरकार तैयार है
- CBI जांच नहीं होगी
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फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा- सरकार
वहीं सरकार ने कहा कि धांधली की जांच ईडी से होगी. फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा. विशेषज्ञों की राय के अनुसार रिफॉर्म किया जाएगा. सरकार ने कहा कि सीजीएल में रिटार्यड जज की अध्यक्षता में जांच कराई जा सकती है, छात्रों ने मना कर दिया है. सीजीएल की परिक्षा केंद्र सरकार द्वारा ली गई थी. हम लोग इसे अपने लेवल पर रद्द नहीं कर सकते.
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी अनियमितताओं को दोतरफा तरीके से हल करने का फैसला किया है. आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी. इसके अलावा, वित्तीय असर और अवैध वित्तीय लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा.
CGL परीक्षा रद्द करने का हमारे पास अधिकार नहीं- मंत्री
मंत्री ने कहा कि इसके बाद एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी. ज़रूरी सुधारों के बारे में, सरकार ने कहा कि इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी. इन चर्चाओं के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग की. सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि चूंकि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और वर्तमान में उनकी निगरानी में है इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है.
98 फीसदी बिंदुओं पर सहमति बनी- मंत्री
सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार ने एक रिटायर जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जांच की देखरेख करने का प्रस्ताव दिया. हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. हमारा मानना है कि 98 फीसदी बिंदुओं पर सहमति हो गई. बाकी दो प्रतिशत - विशेष रूप से CGL परीक्षा रद्द करने की मांग - को पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि सरकार अदालत के आदेशों के तहत आयोजित परीक्षा को एकतरफा रूप से रद्द नहीं कर सकती, जिसके परिणाम घोषित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवार पहले से ही नौकरी कर रहे हैं.
