रांची छात्र आंदोलन के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी तबीयत और स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने की इच्छा को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें अपनी पसंद के अनुसार इलाज कराने की पूरी आजादी है. उन्होंने साफ कहा कि अगर उनकी हालत गंभीर होती है तो इसकी जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी, अस्पताल की नहीं.

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देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "लिखकर दिया था कि मैं झंडा ध्वजारोहण के लिए जाना चाहता हूं. अगर आप लोगों को लगता है कि मेरी तबीयत खराब है, तो मैं अपना इलाज अपने हिसाब से करने के लिए स्वतंत्र हूं. यह आजादी मेरी है. मुझे जाने की इजाजत दी जाए. अगर मेरी तबीयत खराब होती है, हम सीरियस होते हैं, तो सारी जिम्मेदारी मेरी खुद की रहेगी. इस अस्पताल की कोई जवाबदेही नहीं होगी."

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उन्होंने आगे कहा, "मेरा कोई यह मजबूरी है क्या कि मैं अपनी तबीयत खराब होने का इलाज कोई एक ही जगह कराऊं? मेरी इच्छा, मेरी आजादी, मेरी इच्छा है कि मैं जहां संतुष्ट होऊंगा, मैं वहां इलाज कराऊंगा. डॉक्टर ने हमें परमिशन दिया ही नहीं. डॉक्टर की परमिशन की क्या बात करें? बुलाइए डॉक्टर को मेरे सामने. कौन डॉक्टर बोला? मैं उसको फेस-टू-फेस टेबल टॉक करूंगा."

डीसी और एसडीएम को दी थी चिट्ठी

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि तिरंगा फहराने की इच्छा को लेकर उन्होंने प्रशासन को पहले ही जानकारी दी थी. उन्होंने कहा, "कल से आपको रिसीविंग दिखा देंगे. डीसी महोदय को चिट्ठी दिया हुआ है झंडा फहराने को लेकर के. एसडीएम को दिया हुआ है. मैं इच्छा जाहिर किया हूं. सुनिए, मैं इच्छा जाहिर किया हुआ हूं."

उन्होंने बताया कि डॉक्टर और प्रशासन की ओर से उन्हें तिरंगा फहराने के लिए जाने की बात कही गई थी. उनके मुताबिक, "आज, कल से डॉक्टर बोले हमको कि जाना, देवेंद्र फहरा लेना. सुबह 9:30 बजे तक बोला गया. प्रशासन बोले कि ठीक है, हम अपनी गाड़ी से ले जाकर झंडा फहराकर आपको लेकर आएंगे."

देवेंद्र नाथ महतो ने आरोप लगाया कि इसके बाद अचानक माहौल बिगड़ गया. उन्होंने कहा, "उसके बाद 9:21 में अचानक सब टूट पड़े, एग्रेसिव मूड में हुजूम और हाथापाई होती है. मेरे साथ धक्का-मुक्की होती है. उसके बाद मेरे बचाव में जो आते हैं, उस पर पटक-पटककर मारा जाता है. सीसीटीवी निकालिए यहां से."

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'आखिरी सांस तक तिरंगा फहराना चाहता हूं'

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी भावना बताते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "आज 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस. मेरे जैसा देशभक्त लोग अपनी इच्छा बता रहे हैं. आपकी इच्छा हम नहीं बता रहे हैं. हम अंतिम सांस भी रहे तो आज के इस गौरवशाली दिन पर मैं इस हमारे शान तिरंगे को लहराऊं. यह मेरा एक अंतिम इच्छा, अंतिम सांस में मेरा यह इच्छा रहेगा और मैं इस देशभक्ति की भावना से झंडा फहराने जा रहा था."