झारखंड से राज्यसभा की 2 सीटों के लिए गुरुवार (18 जून) को मतदान संपन्न हो गया. क्रॉस वोटिंग में बीजेपी के समर्थन से परिमल नाथवानी ने झारखंड राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की है. नाथवानी ने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया है. साथ ही आम लोगों के हित में काम करने का भरोसा दिलाया है. 

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परिमल नाथवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''राज्यसभा सदस्य के तौर पर चौथे कार्यकाल के लिए सेवा करने का मौका मिलने पर मैं बहुत आभारी हूं. यह पल मेरे लिए बहुत भावुक करने वाला है क्योंकि यह झारखंड से मेरा तीसरा कार्यकाल होगा. यही वह धरती है जहां से 2008 में मेरी संसदीय यात्रा शुरू हुई थी. अपनी कर्मभूमि में एक बार फिर लौटना मेरे लिए बहुत गर्व का विषय है.''

नए संकल्प और ईमानदारी से लोगों के हित में काम करेंगे- नाथवानी

उन्होंने आगे लिखा, ''मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का उनके समर्थन के लिए तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं. झारखंड विधानसभा के उन सभी सदस्यों का भी दिल से धन्यवाद जिन्होंने इस पूरी यात्रा के दौरान वोट दिया और समर्थन किया. नए संकल्प और ईमानदारी के साथ, झारखंड और यहां के लोगों के हितों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहेगा. जोहार झारखंड!''

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JMM के बैद्यनाथ राम जीते

राज्यसभा की सदस्यता के लिए चुनावी मुकाबला INDIA गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर JMM के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा एवं एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच हुआ. सूत्रों के मुताबिक JMM प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले. वहीं, एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 20 वोट मिले हैं. 

झारखंड में विधायकों की संख्या

जेएमएम- 34कांग्रेस- 16आरजेडी- 4लेफ्ट- 2

बीजेपी- 21एलजेपी (आर)- 1आजसू- 1जेडीयू- 1

बता दें कि झारखंड में राज्यसभा की दो सीटो पर चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदेश की सियासत गरमाई हुई थी. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के विधायक रांची के एक होटल में ठहरे हुए थे, जबकि कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए अलग रणनीति अपनाई थी. सियासी दलों की ओर से क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं और चुनावी गणित को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा था.