झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में कथित अनियमितताओं और धांधली को लेकर शुरू हुआ युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. राजधानी रांची में अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) कर रहे प्रदर्शनकारियों की स्थिति अब चिंताजनक, लेकिन स्थिर बनी हुई है. पुलिस के साथ झड़प और तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए तीन अनशनकारियों सहित कुल पांच लोगों का रांची के सदर अस्पताल में लगातार इलाज चल रहा है.

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रांची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने इन सभी प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति पर ताजा जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो, राहुल क्रांति और उम्मे हबीबा का उपवास अभी भी जारी है. राहत की बात यह है कि उनके शरीर के महत्वपूर्ण शारीरिक संकेत (वाइटल्स) फिलहाल स्थिर हैं. डॉ. प्रसाद के मुताबिक, "अस्पताल में भर्ती सभी पांचों युवाओं के स्वास्थ्य की 24 घंटे लगातार निगरानी की जा रही है. कमजोरी को दूर करने के लिए उन्हें डेक्सट्रोज नॉर्मल सलाइन (DNS) के जरिए मल्टीविटामिन दिया जा रहा है. हालांकि, उनके शरीर में सोडियम और पोटैशियम समेत इलेक्ट्रोलाइट का स्तर अभी भी सामान्य नहीं हो पाया है." चिकित्सकों की एक विशेष टीम इनकी सेहत पर करीबी नजर रख रही है.

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विधानसभा घेराव में हुए थे घायल

अस्पताल में भर्ती पांच लोगों में से दो अन्य की पहचान मध्य प्रदेश निवासी शिवम सिंह और हजारीबाग जिले के कृष्णा के रूप में हुई है. इन दोनों को 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर निकाले गए आक्रोश मार्च के दौरान चोटें आई थीं, जिसके बाद इन्हें अस्पताल लाया गया था. वहीं, अनशनकारी देवेंद्र महतो को भी 10 अगस्त को पुलिस लाठीचार्ज और झड़प के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

आंदोलन को भटकाने का आरोप

सदर अस्पताल के बेड से ही देवेंद्र महतो ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उनके अनिश्चितकालीन अनशन का यह 13वां दिन है. महतो ने जिला और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कई बार वापस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम (जहां मुख्य विरोध प्रदर्शन चल रहा है) लौटने का आग्रह किया है, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें मुख्य प्रदर्शन स्थल से दूर रखकर इस पूरे छात्र आंदोलन को उसके मूल मकसद से भटकाने की साजिश रच रहे हैं.

हालांकि, महतो के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिविल सर्जन अमरेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर जानकारी छिपाने या रोकने जैसी कोई बात नहीं है. मरीज के जरूरी संकेतक भले ही सामान्य हों, लेकिन गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण उन्हें चिकित्सकीय दृष्टिकोण से अभी अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा सकती. दूसरी ओर, जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़ीं और बोकारो की रहने वाली उम्मे हबीबा ने बताया कि 4 अगस्त से शुरू हुई उनकी भूख हड़ताल का यह लगातार 10वां दिन है. वह सात अगस्त से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनका अनशन भी जारी है.

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