JPSC की परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर अलग-अलग याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. गुरुवार की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अदालत में याचिका याचिका दायर करने वालों को बड़ी राहत देते हुए सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार (18 अगस्त) को अधिसूचना जारी कर झारखंड लोक सेवा आयोग और एक बाहरी एजेंसी की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे.

सफल अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन

सरकार के इस फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. एक अभ्यर्थी ने कहा, "सरकार ने फैसला कैसे लिया है, ये कहना मेरे बस की बात नहीं है. लेकिन ये सरासर नाइंसाफी है. मेरी नौकरी हुई है, उसका जवाब कौन देगा. मेरे खिलाफ अगर कोई सबूत है तब तो आप मेरे खिलाफ कार्रवाई करेंगे? बिना किसी जांच और सबूत के मेरी नौकरी एक दिन में छीन ली, ये कहां का न्याय है."

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अभ्यर्थियों के वकील ने क्या कहा?

अभ्यर्थियों की तरफ से पक्ष रखने वाले वकील कुमार हर्ष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''हमारी तरफ से इंटरवेंशन एप्लीकेशन फाइल की गई थी. सरकार ने जिन परीक्षाओं को रद्द किया है उसके खिलाफ रिट याचिका दायर की गई थी, उसको चैलेंज कर रहे थे. उनका ये कहना है कि कोई भी नेचुरल जस्टिस को फॉलो नहीं किया गया है. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं का ये भी कहना है कि उनकी क्या गलती थी, ये भी कहीं रिकॉर्ड में नहीं आ रहा है. हमारी ओर से जो इंटरवेंशन एप्लीकेशन फाइल किया गया उसमें जो आरोप लगाए गए हैं, उसे राज्य सरकार मान रही है.'' 

15 दिन में सरकार को जवाब दाखिल करना है- वकील

एडवोकेट ने आगे कहा, ''ऐफिडेविट में जेपीएससी ने ये भी मानने का काम किया है कि जो कॉपी जांचने का जो नियम है, उसमें एक्सपर्ट होते हैं लेकिन वो एक्सपर्ट नहीं थे. टीडीपीएल जैसी कंपनी को ओएमआर स्कैनिंग का काम दिया गया है, जांचने का काम दिया गया तो उस पर भी सवाल उठते हैं. हमने सरकार के सामने अपना ये पक्ष रखा है. अदालत रिपोर्ट देखती है और साक्ष्य देखती है. साक्ष्य रिपोर्ट के हिसाब से दिखना चाहिए. ये सरकार का दायित्व बनता है कि रिपोर्ट आए. 15 दिन में सरकार को जवाब दाखिल करना है.''

झारखंड CLP नेता प्रदीप यादव ने क्या कहा?

झारखंड हाई कोर्ट से 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाने पर, झारखंड CLP नेता प्रदीप यादव ने कहा, "सरकार भी कोर्ट के फैसले को मानेगी, हम सभी इसे मानते हैं. मुझे लगता है कि जांच से एक-एक करके सारी बातें सामने आएंगी, तभी इस बारे में कुछ कहा जा सकता है. प्रथम दृष्टया सरकार को लगा कि इन परीक्षाओं में कुछ गड़बड़ियां थीं और इसलिए उन्हें रद्द कर दिया गया. कोर्ट के सामने रखी गई याचिकाओं के आधार पर ही कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाई होगी. जिन लोगों ने अपनी मेहनत से, मां-बाप की गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च करके नौकरी पाई है, उनके प्रति सहानुभूति है."

याचिकाकर्ताओं का क्या है तर्क?

हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर करने वाले अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना एकतरफा तरीके से परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया है. बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं. ऐसे में सरकार के फैसले से उनकी नौकरी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है.

अभ्यर्थियों का ये भी कहना है कि अगर जांच में किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को बिना जांच और सुनवाई नौकरी से हटाना सही नहीं है. उनका दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट में स्थान हासिल किया और उसके बाद नियुक्ति मिली.

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