झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने बातचीत का हाथ बढ़ाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर समिति गठित कर छात्रों को वार्ता के लिए बुलाया गया है. हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर कायम हैं.

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झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा, "छात्रों से बातचीत को लेकर मुख्यमंत्री ने कल भी और आज भी बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है. एक समिति का गठन किया गया है और छात्रों को संदेश भेजा गया है कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है."

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उन्होंने आगे कहा, "उनसे कहा गया है कि वे अपना प्रतिनिधिमंडल तय करें और उसके सदस्यों के नाम दें, ताकि सरकार की समिति उनसे बातचीत कर सके. हमने यह संदेश भेज दिया है और अब हमें इंतजार है कि छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कब गठित होकर बातचीत के लिए आता है. सरकार ने उन्हें चर्चा के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है, क्योंकि संवाद बेहद जरूरी है."

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी कहा कि सरकार ने बातचीत का रास्ता खोल दिया है और छात्रों की बात सुनी जाएगी. उन्होंने कहा, "हमने समिति का गठन कर दिया है. बातचीत का रास्ता खोल दिया गया है. छात्रों से बातचीत होगी, उनकी मांगों को सुना जाएगा और यदि उनकी बातें उचित और स्वीकार करने योग्य होंगी, तो सरकार उन्हें स्वीकार भी करेगी."

शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार है. छात्र ने कहा, "झारखंड के किसी भी शिक्षण संस्थान या विश्वविद्यालय में ठीक ढंग से पढ़ाई नहीं हो रही है. हम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस्तीफा नहीं चाहते. हमारी उनसे सिर्फ यही मांग है कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए. आप किसी से भी सलाह लें, किसी को भी बुलाएं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाइए."

तिरंगा मार्च निकाल रहे छात्रों में शामिल एक छात्रा ने कहा कि तिरंगा मार्च का उद्देश्य कथित परीक्षा और नौकरी घोटालों के खिलाफ आवाज उठाना है. उसने कहा, "हम यह तिरंगा मार्च झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाल रहे हैं, ताकि परीक्षा के प्रश्नपत्रों और नौकरियों की कथित खरीद-फरोख्त पर रोक लग सके. हमारी मांग है कि सरकार के साथ जो भी बातचीत हो, वह मीडिया की मौजूदगी में और पूरी पारदर्शिता के साथ हो."

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अब छात्रों के जवाब का इंतजार

सरकार की ओर से बातचीत के लिए समिति का गठन कर छात्रों को प्रतिनिधिमंडल भेजने का न्योता दिया गया है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छात्र अपना प्रतिनिधिमंडल कब तय करते हैं और सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया कब शुरू होती है.

दूसरी ओर, आंदोलनरत छात्रों के अलग-अलग समूह अपनी-अपनी मांगों पर कायम हैं. कुछ छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि कुछ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता के मुद्दे पर सरकार से जवाब चाहते हैं.