झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. छात्र आंदोलन के बाद JSSC-CGL की परीक्षा कैंसिल करने के जो आदेश सोरेन सरकार ने दिया था, उसपर अब हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है. यानी अब न ही परीक्षा और ही नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है. नियुक्त कर्मियों को हटाने की कार्रवाई पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी है.

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जानकारी के लिए बता दें कि हेमंत सोरेन सरकार द्वारा सीजीएल परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को अभ्यर्थियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार के आदेश पर रोक लगाई. वहीं, अदालत के इस फैसले से आंदोलन कर रहे छात्रों के चेहरे पर मायूसी आ गई है. 

इन सबके बीच भर्ती परीक्षाओं के सफल उम्मीदवारों ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया. आदिवासी नायक बिरसा मुंडा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की तस्वीरें और तख्तियां लिए हुए प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने 'न्याय दो या फांसी दो' और 'शर्म करो, शर्म करो' के नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) में चयनित उम्मीदवार भी शामिल थे. कल्याण अधिकारी के तौर पर चयनित देवघर निवासी रमेश मंडल ने कहा कि वह 19 अगस्त से प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे.

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न्यायपालिका पर पूरा भरोसा- प्रदर्शनकारी

चंदा कुमारी नामक एक अन्य उम्मीदवार ने कहा, 'मैं सरकार से अपील करती हूं कि वह जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का अपना फैसला वापस ले क्योंकि यह निर्णय बिना कोई कारण बताए लिया गया था.' 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि अदालत सभी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा देगी. उच्च न्यायालय ने बुधवार को 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचना पर रोक लगा दी.