झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ 14 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार (8 अगस्त) की शाम को राज्य सरकार और छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडडल के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई. यह बातचीत करीब डेढ़ घंटे तक चली. छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया हालांकि, बातचीत अंतिम समझौते पर नहीं पहुंची है 

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जेपीएससी में धांधली को लेकर प्रोटेस्ट के बीच बीजेपी नेता निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे को संसद में भी उठा रहे हैं. यह झारखंड के बच्चों के भविष्य का सवाल है. हम प्रयास करेंगे की इसकी सीबीआई जांच हो. यह कोर्ट के माध्यम से हो या दबाव के माध्यम से हो या छात्रों के आंदोलन के कारण हो. किसी भी आधार पर इसकी जांच कराएंगे और ऐसी सजा दिलवाएंगे कि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत न करे."

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निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर लगाया आरोप

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर आरोप मढ़ दिए हैं. उन्होंने कहा, "यहां से पैसा जा रहा है. कांग्रेस के पास पैसा कमाने के लिए बहुत कम राज्य बचे हैं. कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और हिमाचल में तो लोगों को पैसा देने के लिए भी नहीं है." 

उन्होंने कहा, "झारखंड लूट का एक बड़ा साधन है. कांग्रेस ने किस तरह से झारखंड में सरकार बनाई और किस तरह से लूट हुई." उन्होंने आगे कहा, "साल 2004 से जब उनकी सरकार चली तो उन्होंने सिर्फ लूट की. झारखंड उनके लिए कमाई का साधन है इसलिए वह कोई इस्तीफा नहीं देंगे."

एफसीआरए बिल को लेकर क्या बोले सांसद?

बीजेपी सांसद ने एफसीआरए बिल को लेकर कहा, "यह बिल पेश है. संथाल में हम खड़े हैं यहां 1951 में आदिवासियों की जनसंख्या 45 फीसदी थी. यह संख्या 2011 की जनगणना के हिसाब से 26 परसेंट है और अभी जो जनगणना चल रही है उसके हिसाब से मुझे लगता है कि 20-21 प्रतिशत बचेगी." उन्होंने बताया कि 2011 में मुसलमान 9 प्रतिशत थे वे 24 प्रतिशत हो गए थे. आज मुझे लगता है ये लगभग 30 प्रतिशत के आसपास होंगे.

उन्होंने आगे कहा, "जो इलाका विस्थापन, पलायन का शिकार है और रोजगार को कोई साधन नहीं है. पीने का पानी नहीं है उस इलाके में मुसलमान कहां से आए. यह सभी बांग्लादेश से आए हुए मुसलमान हैं जिन्होंने हमारे जल, जंगल और जमीन पर कब्जा कर लिया है."

उन्होंने कहा, "मदरसों-मस्जिदों की बाढ़ है जिसमें केवल जिहादी पैदा होते हैं. उनका काम सिर्फ धर्मांतरण कराना और आदिवासी भाई-बहनों से जबरदस्ती शादी कर लेना है." उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर यहां की जल-जंगल और जमीन को बचाना है तो एफसीआरए जरूरी है. उन्होंने कहा कि एफसीआरए होगा तो यह सभी सलाखों के पीछे होंगे.

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