श्रीनगर अपनी खूबसूरत डल झील, निशात और शालीमार गार्डन के लिए दुनियाभर में मशहूर है. अब शहर में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है. शहर के बीचोंबीच स्थित मशहूर पोलो ग्राउंड पार्क को 'वेस्ट टू वंडर गार्डन' के तौर पर तैयार कर जनता के लिए खोल दिया गया है. खास बात यह है कि इस गार्डन में सजावट के लिए बाजार से कोई नई चीज नहीं खरीदी गई है. यहां बेकार पड़ी चीजों और पुराने सामान को दोबारा इस्तेमाल करके खूबसूरत कलाकृतियां तैयार की गई हैं.

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प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस गार्डन को तैयार करने में एक साल से ज्यादा का समय लगा. आज जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे आम लोगों के लिए खोल दिया. लाल चौक और डल झील के पास स्थित यह गार्डन स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रीनगर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण बनने वाला है.

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उमर अब्दुल्ला ने कहा, "यह एक अच्छी पहल है और इस बगीचे का मकसद लोगों को यह बताना है कि बेकार चीजों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, इसके लिए उन्हें रॉक गार्डन जाने की जरूरत नहीं है. इस बगीचे को देखने के बाद लोग अब कोई भी चीज फेंकने से पहले दो बार सोचेंगे और हर चीज का दोबारा इस्तेमाल करेंगे."

कबाड़ से तैयार हुईं 35 से ज्यादा कलाकृतियां

कश्मीर के फ्लोरीकल्चर डायरेक्टर मथूरा मासूम के मुताबिक, गार्डन को तैयार करने के लिए बाजार से कुछ भी नया नहीं खरीदा गया. विभाग ने अपने बगीचों और सरकारी दफ्तरों में लंबे समय से बेकार पड़े सामान को इकट्ठा किया और उसे अलग-अलग कलाकृतियों में बदल दिया. यहां 35 से ज्यादा ऐसी कलाकृतियां तैयार की गई हैं, जो लोगों का ध्यान खींच रही हैं.

मासूम ने कहा, "बाजार से कुछ भी नहीं खरीदा गया है. सब कुछ हमारे बगीचों और दफ्तरों से मिली बेकार चीजों का दोबारा इस्तेमाल करके बनाया गया है."

गार्डन की लैंडस्केपिंग में पिछले करीब चार दशकों से सरकारी दफ्तरों में बेकार पड़े सामान का इस्तेमाल किया गया है. इसमें 1980 के दशक की एक पुरानी एम्बेसडर कार, पुराना ट्रैक्टर, धातु के पुराने खंभे और हाथ-गाड़ियां शामिल हैं. इन चीजों को नया रूप देकर गार्डन की सजावट का हिस्सा बनाया गया है.

गिरी हुई लकड़ियों और पुराने दफ्तर के कबाड़ से भी कई तरह की आकृतियां तैयार की गई हैं. इनमें खिलौना ट्रेन, कैटरपिलर और विशाल मकड़ी जैसी कलाकृतियां शामिल हैं. बच्चों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई ये आकृतियां गार्डन का खास आकर्षण हैं.

पुराने टायर और इलेक्ट्रिक केतली बने प्लांटर

गार्डन में पुराने टायरों को भी बेकार नहीं समझा गया. इन्हें आकर्षक प्लांटर के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. वहीं खराब हो चुकी इलेक्ट्रिक केतलियों को भी फूलों के गुलदस्ते और प्लांटर का रूप दिया गया है. इस तरह बेकार सामान को खूबसूरत और उपयोगी चीजों में बदलने की कोशिश की गई है.

मासूम ने कहा, "लोगों को कुछ अलग अनुभव होना चाहिए. मकसद यह है कि कचरे को सिर्फ इकट्ठा न किया जाए, बल्कि उसका दोबारा इस्तेमाल किया जाए."

मौसम की चुनौती के बीच खिले खूबसूरत फूल

गार्डन में इस साल फूलों की अच्छी रौनक देखने को मिल रही है. मथूरा मासूम ने कहा, "भले ही यह पहला साल है, हमने इतने सुंदर फूलों की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन अल्लाह की हम पर मेहरबानी है." उन्होंने कश्मीर में मौसम के उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया. तेज गर्मी और भारी बारिश के बावजूद गार्डन को खूबसूरत बनाए रखने की कोशिश की गई है.

फ्लोरीकल्चर विभाग इन दिनों पर्यटकों की अलग-अलग पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पार्कों और गार्डनों को नए तरीके से विकसित कर रहा है. पिछले साल क्राइसेंथेमम गार्डन को थीम गार्डन के तौर पर शुरू किया गया था. विस्तार के बाद इसे अक्टूबर में फिर से पर्यटकों के लिए खोला जाएगा.

ऐतिहासिक बादामवारी गार्डन को भी सालभर घूमने लायक जगह के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यहां 6.25 एकड़ में तैयार किया गया लैवेंडर गार्डन भी पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी में है. अब वेस्ट टू वंडर गार्डन को इस सूची में एक नए आकर्षण के तौर पर जोड़ा गया है.

फिलहाल इस गार्डन का कोई आधिकारिक नाम तय नहीं किया गया है. विभाग के लोग इसे 'वंडर गार्डन' के नाम से बुला रहे हैं. भविष्य में इसका नाम तय किया जाएगा और इसमें आम लोगों को भी शामिल किया जा सकता है.

फ्लोरीकल्चर डायरेक्टर मथूरा ने कहा, "हमने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसका कोई नाम नहीं रखा है, लेकिन विभाग के अंदर हम इसे 'वंडर गार्डन' कहते हैं."

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दूसरे इलाकों में भी अपनाया जाएगा मॉडल

कश्मीर घाटी का यह पहला 'वेस्ट टू वंडर' गार्डन है. इसके सफल होने के बाद फ्लोरीकल्चर विभाग इस मॉडल को दूसरी जगहों पर भी लागू करने की तैयारी में है. इसका मकसद सिर्फ पार्कों को खूबसूरत बनाना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि बेकार समझी जाने वाली चीजों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.

यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के 'रिड्यूस, रियूज और रीसायकल' यानी कम करना, दोबारा इस्तेमाल करना और रीसायकल करने के सिद्धांत पर आधारित है. ऐसे में श्रीनगर का यह नया गार्डन पर्यटकों के लिए घूमने की जगह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग का संदेश देने वाला अनोखा उदाहरण भी बन सकता है.