जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में रिकॉर्ड तोड़ न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है, जिससे पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गया है. दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में न्यूनतम तापमान में गिरावट देखा गया. जहां कश्मीर के श्रीनगर शहर में इस मौसम की अब तक की सबसे ठंडी रात माइनस 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई, वहीं लद्दाख के द्रास क्षेत्र में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान -24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे यह क्षेत्र का सबसे ठंडा आबादी वाला इलाका बन गया.

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तापमान माइनस में दर्ज

श्रीनगर शहर की घाटी में रात के बहुत कम तापमान होने के कारण पानी के नल, सड़कों पर जमा पानी और उथले जलाशय माइनस 6 डिग्री सेल्सियस पर जम गए. वहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर भी कम हो गया है, क्योंकि श्रीनगर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके बाद गुलमर्ग स्की रिसॉर्ट में न्यूनतम तापमान माइनस 7.2 डिग्री सेल्सियस और पहलगाम में माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

लद्दाख क्षेत्र भी कड़ाके की ठंड की चपेट में है, जहां सभी इलाकों में तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया है. लेह में तापमान माइनस 14.4°C, हानले में माइनस 16.2°C, कारगिल में माइनस 13.2°C और नुब्रा घाटी में माइनस 14.2°C दर्ज किया गया. जम्मू शहर में भी न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस, कटरा शहर में 3.5, बटोटे में 1, बनिहाल में माइनस 0.9 और भद्रवाह में माइनस 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस साल के समय के सामान्य तापमान से कई डिग्री कम है.

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40-दिवसीय कठोर सर्दियां समाप्त होने पर, मगर बर्फबारी नहीं

मौसम विज्ञान विभाग (MeT) ने 20 जनवरी तक आमतौर पर ठंडे, शुष्क मौसम का पूर्वानुमान लगाया है. इस अवधि के दौरान बारिश/बर्फबारी की बहुत कम संभावना है, सिवाय ऊंचे इलाकों में कुछ छिटपुट बारिश को छोड़ कर. वहीं लगातार सूखे के कारण जम्मू-कश्मीर में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि सभी जल स्रोत जिन पर कृषि, बागवानी और पीने के पानी की जरूरतें निर्भर करती हैं, वे 'चिल्लई कलां' नामक 40-दिवसीय कठोर सर्दियों की अवधि के दौरान भारी बर्फबारी में जम जाती हैं. यह महत्वपूर्ण 40-दिवसीय अवधि पहले ही आधी बीत चुकी है, और घाटी के मैदानी इलाकों में अभी तक इस मौसम की पहली बर्फबारी नहीं हुई है. वहीं चिल्लई कलां 30 जनवरी तक समाप्त भी हो जाएगी.

ठंडे सूखे मौसम से बढ़ रहीं दिल से जुड़ी बीमारियां

जम्मू-कश्मीर फरवरी और मार्च में बर्फबारी का बहुत कम महत्व होता है, क्योंकि यह जल्दी पिघल जाती है और पहाड़ों में बारहमासी जल भंडारों को फिर से भरने में कोई मदद नहीं करती है. वहीं यहां पर ठंडे, सूखे मौसम की वजह से सीने और दिल से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ रही हैं, जिसके कारण पल्मोनोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट के अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है. जिन लोगों को पहले से सीने और दिल से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें डॉक्टरों ने ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है, और ऐसे कमजोर लोगों को बहुत ज्यादा ठंड की लहर में अपने घरों से बाहर न निकलने की भी सलाह दी गई है.