PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों को सुरक्षित भारत लाने की मांग की है. उन्होंने इस मामले में सरकार से तुरंत दखल देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि कश्मीरी छात्रों के माता-पिता का दावा है कि ईरान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने वहां मौजूदा तनाव के बीच कश्मीरी छात्रों सहित भारतीय छात्रों को निकालने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है.

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यह मांग ईरान में पढ़ रहे कई कश्मीरी छात्रों के माता-पिता द्वारा वहां की स्थिति पर चिंता जताने और केंद्र सरकार से अपने बच्चों की वापसी की सुविधा देने की अपील करने के एक दिन बाद आई है.

पीडीपी चीफ ने X पर किया पोस्ट

महबूबा मुफ्ती ने X पर एक पोस्ट में कहा, "कश्मीर सहित देश भर के हजारों छात्र मौजूदा अस्थिर स्थिति के बीच ईरान में फंसे हुए हैं. इससे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता में गहरा डर और चिंता पैदा हो गई है. एस जयशंकर और विदेश मंत्रालय से आग्रह है कि वे तुरंत दखल दें और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें."

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10 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र ईरान में हैं

अनुमानों के अनुसार, छात्रों सहित 10 हजार से अधिक भारतीय वर्तमान में ईरान में रह रहे हैं, जिनमें अकेले जम्मू-कश्मीर से दो हजार से ज्यादा लोग शामिल हैं. नई एडवाइजरी में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीयों, जिसमें छात्र, तीर्थयात्री, व्यवसायी और पर्यटक शामिल हैं, से कमर्शियल फ्लाइट्स सहित उपलब्ध परिवहन साधनों से ईरान छोड़ने का आग्रह किया है.

ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों के माता-पिता ने एडवाइजरी जारी होने के तुरंत बाद बुधवार (14 जनवरी) को केंद्र सरकार से देश में चल रहे तनाव के बीच अपने बच्चों को वापस लाने की अपील की. श्रीनगर में प्रेस एन्क्लेव में बड़ी संख्या में चिंतित माता-पिता इकट्ठा हुए और सरकार से दखल देने का आग्रह किया.

कश्मीरी छात्रों के अभिभावकों ने क्या कहा?

एक अभिभावक जफर इकबाल ने abp न्यूज को बताया, "हम प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से छात्रों को ईरान से निकालने की अपील करते हैं." उन्होंने यूक्रेन और ईरान जैसे देशों में पिछले सफल अभियानों को याद करते हुए सरकार की निकासी करने की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया.

हालांकि, सभी माता-पिता और छात्रों के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को खुद ही देश छोड़ने की सलाह दी है. एक अभिभावक ने कहा, "वे छात्रों से अपने माता-पिता से संपर्क करने और स्वतंत्र रूप से अपनी यात्रा की व्यवस्था करने के लिए कह रहे हैं. हम ISD कॉल के जरिए अपने बच्चों से बहुत मुश्किल से संपर्क कर पा रहे हैं, और हम केंद्र शासित प्रदेश और केंद्र दोनों के अधिकारियों से उनके निकासी में मदद करने का आग्रह करते हैं."

ईरान इंटरनेट बंद होने से आ रही दिक्कतें

एक छात्र की मां ने ईरान में इंटरनेट बंद होने के कारण माता-पिता को यात्रा टिकट भेजने में हो रही कठिनाई पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "मैं सरकार से अपील करती हूं कि वह छात्रों को वहां से निकाले. अगर हम उनके लिए टिकट बुक भी कर देते हैं, तो भी इंटरनेट बंद होने की वजह से हम उन्हें भेज नहीं सकते. यह उनके लिए लगभग नामुमकिन हो गया है. उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकाला जाना चाहिए."

तेहरान में शुरू हुआ था विरोध प्रदर्शन

ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने के बाद बीते महीने के अंत में तेहरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. इसके बाद ये विरोध प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं, जो आर्थिक समस्याओं के खिलाफ आंदोलन से राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल गए हैं.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में देश में कुल मिलाकर स्थिति बहुत खराब हो गई है, क्योंकि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 2,500 से ज्यादा हो गई है.