जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि अमेरिका और इजराइल के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं. ईरान के साथ भी ऐतिहासिक रूप से हमारे संबंध मजबूत रहे हैं. मैंने इसे तब व्यक्तिगत रूप से देखा है, जब मैं अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री था. ईरान के पड़ोसी देशों के साथ भी भारत के अच्छे संबंध हैं.

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पीएम मोदी का जिक्र कर क्या बोले सीएम?

सीएम अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘इसलिए यदि यह सदन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर अपील करे कि वह अपने पद एवं अपने व्यक्तिगत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त कराने में मदद करें ताकि वहां के लोगों की पीड़ा खत्म हो और ईरान एक बार फिर दुनिया के साथ शांतिपूर्वक जुड़ सके तो इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.’’

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सीएम उमर अब्दुल्ला ने 'ईरान पर थोपी गई अन्यायपूर्ण एवं अवैध जंग' की शुक्रवार (27 मार्च) को निंदा की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस युद्ध को मानवता के हित में समाप्त कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया. उन्होंने विधानसभा में सदन के नेता के रूप में यह बयान दिया. इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायकों ने इस मामले में बयान दिए जाने की मांग की थी जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ईरान संकट एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और यह इस सदन के दायरे में नहीं आता.

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर जताया दुख

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं ईरान पर थोपी गई इस अन्यायपूर्ण और अवैध जंग की अपनी और अपने सहयोगियों की ओर से कड़ी निंदा करता हूं. मैं अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और इस संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.’’

सीएम ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री से भी अपील करता हूं कि वह इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त कराने में मदद के लिए सभी उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों एवं संबंधों का इस्तेमाल करें. इससे न केवल हमें, बल्कि पूरी मानवता को लाभ होगा.’’

सदन की कार्यवाही रही स्थगित

जम्मू कश्मीर विधानसभा में पांच सप्ताह के अवकाश के बाद शुक्रवार को बजट सत्र फिर से शुरू होने पर हंगामा मचने के बीच सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा. स्थगन के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने सदन के नेता से ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में बयान देने की मांग की. इस मांग के समर्थन और विरोध में विभिन्न विधायकों के संक्षिप्त भाषण हुए.

सीएम ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर से शुरुआत में कहा, ‘‘इस मुद्दे पर सदन एकमत नहीं है; इस पर एक राय नहीं है. यदि आप चाहें, तो चर्चा कराई जा सकती है ताकि अलग-अलग विचार व्यक्त किए जा सकें. अगर मैं इस मांग के पक्ष में बोलूं और उसके बाद विरोध सामने आए तो यह उचित नहीं होगा.’’ उन्होंने अध्यक्ष से यह तय करने को कहा कि आगे कैसे बढ़ा जाए. राठेर ने दोनों पक्षों के कई सदस्यों की राय सुनने के बाद मुख्यमंत्री से सदन में बयान देने का अनुरोध किया और कहा कि संसद में भी ऐसा किया गया है.

'कितनी भी निंदा करके यह बयां नहीं किया जा सकता'

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि कोई भी यहां खड़े होकर ईरान पर थोपे गए अन्यायपूर्ण एवं अवैध युद्ध का समर्थन कर सकता है. कितनी भी निंदा करके यह बयां नहीं किया जा सकता कि मानवता को किस प्रकार कुचला गया और ईरान के सर्वोच्च नेता एवं उनके करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों को किस क्रूर तरीके से मारा गया.’’ उन्होंने एक स्कूल पर बमबारी में बड़ी संख्या में छात्राओं के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के समय में इससे अधिक भयावह घटना नजर नहीं आती.

'अमेरिका को खुद पक्के तौर पर नहीं पता'

सीएम ने कहा, ‘‘और, उद्देश्य क्या है? यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. अगर आप अमेरिका से आ रहे बयानों को सुनें, तो लगता है कि उन्हें स्वयं पक्के तौर नहीं पता. सुबह वे सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं, दोपहर में सुरक्षा चिंताओं की और शाम तक तेल की कीमतों की बात करने लगते हैं. शायद उन्हें खुद भी नहीं पता कि पिछले तीन सप्ताह से ईरान के लोगों को क्यों पीड़ा झेलनी पड़ी.’’

'इसका सीधा असर हम पर पड़ता है'

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी के सदस्यों का मत है कि सदन को उन मामलों पर चर्चा नहीं करनी चाहिए जो इस क्षेत्र को सीधे प्रभावित नहीं करते. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वे यह कैसे कह सकते हैं कि इसका हम पर असर नहीं पड़ता? हमारे बहुत से नागरिक ईरान में हैं इसलिए इसका सीधा असर हम पर पड़ता है. आज हमारे पेट्रोल पंपों के बाहर लगी कतारें -- क्या वह हम पर सीधा असर नहीं है? और सबसे बढ़कर, हमारे लोगों के मन में जो पीड़ा और व्यथा है, वह भी तो इसका असर है.’’

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