पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता और जम्मू-कश्मीर के विधायक वहीद पारा ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर आरक्षण मुद्दे को हल करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाने का आरोप लगाया है. पारा का कहना है कि मौजूदा आरक्षण नीति अब अस्तित्व का मामला बन चुकी है, जो सीधे तौर पर युवा पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित कर रही है.

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पुलवामा से विधायक वहीद पारा ने शनिवार (27 दिसंबर) को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आरक्षण नीति अस्तित्व का ऐसा मुद्दा बन गई है, जो हमारी युवा पीढ़ियों के भविष्य की बुनियाद पर ही चोट करता है. हम छात्रों के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर जुटे थे, उस बात को एक साल से अधिक हो गया है.”

समाधान की मंशा पर सवाल

उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्य से इस पूरी अवधि में सरकार ने इस मुद्दे का समाधान करने की कोई मंशा नहीं दिखाई. जिससे हमारे युवाओं में तनाव एवं अनिश्चितता और बढ़ गयी है.”

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पारा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सामान्य श्रेणी के छात्र कोटा नीति को तर्कसंगत बनाने में देरी के विरोध में अपना शांतिपूर्ण धरना फिर से शुरू करने की योजना बना रहे हैं.

समिति बनी, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई सामने

पारा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर एक समिति गठित की थी और उसे एक साल हो चुका है, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है. उनका कहना है कि यह धरना सरकार को उसकी उस जिम्मेदारी की याद दिलाता है कि वह पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे और मौजूदा आरक्षण नीति में बदलाव करे.

वहीद पारा ने कहा, “कम से कम आरक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए.” उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित मंत्रिमंडल की उप-समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने का कोई औचित्य नहीं है, भले ही उसकी सिफारिशों को उपराज्यपाल की मंजूरी अभी नहीं मिली हो.

पारा ने कहा, “इसके अलावा, यदि निर्वाचित सरकार यह कहती है कि मामला फिलहाल उपराज्यपाल के पास है, तब भी रिपोर्ट को सार्वजनिक समीक्षा से दूर रखने का कोई औचित्य नहीं है.”