पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विद्रोह की स्थिति को लेकर कश्मीर के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मीरवाइज उमर फारूक चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि विरोध कर रहे नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत बेहद दुखद है. जन आंदोलन से निपटने के लिए बल प्रयोग के बजाय संवाद और शांतिपूर्ण तरीकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
मीरवाइज उमर फारूक ने अपने एक्स एकाउंट पर ट्वीट कर अपनी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने लिखा, 'LoC के पार से आ रही खबरों से बहुत दुख हुआ है. विरोध कर रहे एक दर्जन से अधिक आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत बहुत दुखद है. वहां के अधिकारियों को पता होना चाहिए कि लोगों की शिकायतों और मांगों को इस तरह बल प्रयोग करके नहीं निपटाया जा सकता.'
मीरवाइज उमर फारूक ने कहा- मामले को शांति से सुलझाएं
उन्होंने आगे कहा, 'जब लोग अपनी चिंताएं जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतर जाएं तो ये संकेत है कि उनकी बात सुनी जाए. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि वो उनकी बात सुनें, उनसे बातचीत करें और मामले को शांति से सुलझाएं, न कि इसे हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियों और जान-माल के नुकसान में बढ़ने दें. मीरवाइज ने अपने पोस्ट के अंत में कहा, 'उम्मीद और प्रार्थना है कि समझदारी से काम लिया जाएगा और लोगों की चिंताओं को समझते हुए मामले को परिपक्वता से सुलझाया जाएगा.'
क्या है मामला?
PoJK में हिंसा की चिंगारी 27 जुलाई को होने वाले आगामी चुनाव को लेकर भड़की है. पाकिस्तान में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का विरोध मुख्य रूप से उन 45 विधानसभा सीटों में से 12 को कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने के फैसले के खिलाफ है. ये 12 सीटें 'शरणार्थियों' यानी 1947 में भारतीय कश्मीर से पलायन करने वालों के लिए रिजर्व थीं. JAAC का कहना है इन 12 सीटों पर ऐसे लोग चुनाव लड़ते हैं जो PoJK में रहते ही नहीं हैं. JAAC का कहना है कि ये स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करता इसलिए इन सीटों को खत्म करने की मांग की जा रही है. इसके अलावा पाकिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि यहां स्थानीय लोगों की आवाज को राजनीतिक तरीके से दबाने की साजिश है.
कैसे भड़का आंदोलन?
पाकिस्तान सरकार ने JAAC से बात करने की बजाय 5 जून 2026 को इस संगठन पर एंटी टेररिज्म एक्ट के तहत प्रतिबंध लगा दिया और उसके नेताओं को गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए. इसके साथ ही इंटरनेट बंद के आदेश दे दिए गए, इससे वहां की जनता भड़क गई और प्रदर्शन उग्र हो गया. 8 जून को रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई नागरिक और पुलिसकर्मी मारे गए. इसके बाद ये आंदोलन उग्र हो गया. 9 जून को JAAC के विरोध मार्च के दिन हालात बेकाबू हो गए.
