जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद सरकार के पास लोगों के हित में कानून बनाने का पूरा अधिकार होता है. उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा मिले बिना भी महत्वपूर्ण कानून बनाए जा सकते हैं.
जम्मू में उन्होंने बजट सत्र में पेश किए गए निजी सदस्यों के विधेयकों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कुल 33 बिल चर्चा के लिए लाए गए, जिनमें से 5 शराबबंदी से जुड़े थे. बाकी बिल दिहाड़ी मजदूरों, नए जिलों के गठन और जमीन के अधिकार जैसे अहम मुद्दों से जुड़े थे. महबूबा ने कहा कि जब विधायक ऐसे अहम मुद्दों पर बिल ला सकते हैं, तो सरकार भी ठोस कदम उठा सकती है.
रोजगार और आरक्षण पर सरकार को घेरा
उन्होंने सरकार को उसके वादे याद दिलाते हुए कहा कि एक लाख युवाओं को रोजगार देने और आरक्षण को सही तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की है. उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादों को पूरा करना ही सरकार की असली परीक्षा है.
पुलवामा से विधायक वहीद-उ-रहमान पारा के उस बिल का भी उन्होंने समर्थन किया, जिसमें नए जिलों और चिनाब घाटी व राजौरी के लिए अलग प्रशासनिक डिवीजन बनाने की मांग की गई है. इस बिल को एलजी प्रशासन से चर्चा की मंजूरी मिल चुकी है. महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला की सरकार केंद्र शासित प्रदेश का हवाला देकर कई जरूरी मामलों पर कार्रवाई नहीं कर रही है.
दिहाड़ी मजदूरों के लिए उठाई आवाज
उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों के मुद्दे पर भी जोर देते हुए कहा कि उनके लिए मौजूदा नियमों की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने मानवीय आधार पर मजदूरों को नियमित करने की मांग की और कहा कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए. साथ ही एसआरओ से जुड़े मामलों की फिर से जांच करने की जरूरत बताई.
मध्य पूर्व पर भी दी प्रतिक्रिया
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ईरान बलिदान की भावना से प्रेरित है. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के सैनिकों में लड़ने की इच्छाशक्ति की कमी है, जबकि ईरानी अपने लक्ष्य को लेकर अधिक दृढ़ हैं.
