जम्मू में कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े संगठन पनुन कश्मीर ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है. संगठन ने न केवल इन बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं बल्कि केंद्र सरकार की कश्मीर नीति की भी आलोचना की है. पनुन कश्मीर का कहना है कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और पुनर्वास जैसे गंभीर मुद्दों पर वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया जा रहा है.

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हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों को लेकर दो अहम बयान दिए थे. एक बयान में उन्होंने कहा था कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के लिए आम कश्मीरी जिम्मेदार नहीं हैं. वहीं दूसरे बयान में उन्होंने कहा था कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी का सही समय आ गया है.

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इन दोनों बयानों को लेकर पनुन कश्मीर ने सवाल खड़े किए हैं. संगठन का मानना है कि दोनों बातों में विरोधाभास दिखाई देता है और इससे कश्मीरी पंडितों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं निकलता.

डॉ. अग्निशेखर ने उठाए सवाल

पनुन कश्मीर के नेता डॉ. अग्निशेखर ने उपराज्यपाल के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम पर विस्थापन थोपने वाले क्या अफ्रीका से लोग आए थे. पाकिस्तानी आतंकी जोश में कश्मीर में घुसपैठ करके आए थे उन्हें शरण किसने दी. हाल ही में कश्मीर दौरे पर आए कुछ एनआरआई कश्मीरी पंडितों ने भी वही बात दोहराई जो मनोज सिन्हा कह रहे हैं."

उन्होंने कहा कि कश्मीर का दौरा करने वाले कुछ एनआरआई कश्मीरी पंडितों ने दावा किया कि घाटी में माहौल बदल चुका है. लेकिन जब वे वहां कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से मिले तो उन्हें अलग तस्वीर देखने को मिली.

डॉ. अग्निशेखर के मुताबिक, कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने एनआरआई प्रतिनिधियों को बताया कि वे शाम 7 बजे के बाद बाहर नहीं निकल सकते. कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उन्हें कई बार अपनी ड्यूटी पर नहीं जाने की सलाह दी जाती है. इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "इन्हीं कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उन्हें कहा जाता है कि वह अपनी ड्यूटी पर न जाए, तो ऐसे में कौन सी हवा बदली है."

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

पनुन कश्मीर के नेता ने कहा कि पहले की सरकारों ने संगठन को बातचीत के लिए बुलाया था, भले ही उससे कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. लेकिन मौजूदा सरकार ने अब तक संगठन से संवाद नहीं किया.

उन्होंने कहा, "पुरानी सरकारी हमसे बात की. मोदी जी से पहले की सरकारों ने हमें 3 बार बातचीत के लिए बुलाया, हालांकि इसका नतीजा कुछ नहीं निकला. लेकिन मौजूदा सरकार ने हमें एक बार भी बातचीत के लिए नहीं बुलाया."

अलग यूनियन टेरिटरी की मांग दोहराई

डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि उनकी पुरानी मांग आज भी कायम है. उन्होंने कहा कि कश्मीर में एक अलग यूनियन टेरिटरी बनाई जानी चाहिए, जहां कश्मीरी पंडितों को सुरक्षित तरीके से बसाया जा सके.

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उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों की मूल समस्याओं को हल करने से बच रही है. उनके मुताबिक, यदि सरकार यह कहती है कि कश्मीर में हालात सामान्य हो चुके हैं, पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या पहुंच रही है और फिल्मों की शूटिंग बढ़ रही है, तो फिर कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास भी तुरंत होना चाहिए.

उनका कहना है कि अगर वास्तव में कश्मीर की हवा बदल गई है तो इसका सबसे बड़ा प्रमाण कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक और सुरक्षित घर वापसी होनी चाहिए.