जम्मू संभाग में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) की स्थापना की मांग ने अब उग्र रूप ले लिया है. एक तरफ सांबा जिले में छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है. शिक्षा का यह मुद्दा अब सांप्रदायिक तर्कों और सियासी रस्साकशी में उलझता नजर आ रहा है.
सांबा में प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों का आरोप है कि वे जनवरी माह से लगातार जम्मू में NLU स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही. उनका कहना है कि न तो बजट में इसके लिए कोई वित्तीय प्रावधान किया गया है और न ही प्रशासन से कोई आश्वासन मिला है. आक्रोशित छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे जम्मू में विधानसभा की कार्यवाही ठप कर देंगे.
बीजेपी पर हिंदू-मुस्लिम की सियासत का आरोप
सदन में यह मुद्दा तब और गरमा गया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसे पिछले विवादों से जोड़ दिया. दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस को सिर्फ इसलिए बंद करवा दिया क्योंकि वहां 50 में से 42 छात्र मुस्लिम थे. इसी तर्ज पर एनसी विधायक नजीर अहमद ने सवाल उठाया कि "इस बात की क्या गारंटी है कि अगर NLU में भी कश्मीरी या मुस्लिम छात्र ज्यादा हुए, तो बीजेपी उसे बंद नहीं करवाएगी?" उन्होंने बीजेपी पर वोट बैंक के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने का आरोप लगाया.
आस्था को शिक्षा से न जोड़ें- BJP
चिनैनी से बीजेपी विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने एनसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे और उनकी पार्टी शुरू से छात्रों के साथ है. उन्होंने उमर अब्दुल्ला को नसीहत दी कि माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी का मामला 'आस्था' से जुड़ा था, उसे सामान्य संस्थानों से न जोड़ें. उन्होंने उदाहरण दिया कि जम्मू के कई अन्य शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद वहां कोई भेदभाव नहीं होता. मनकोटिया ने जोर देकर कहा कि कानून के मुताबिक जम्मू में NLU बनना चाहिए और इसे बेवजह सियासी रंग नहीं देना चाहिए.
