जम्मू-कश्मीर में विपक्ष के नेता (LoP) सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के स्वतंत्रता दिवस भाषण की आलोचना करते हुए इसे 'गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 के संवैधानिक फैसलों के बाद भारत का संघीय ढांचा असल में और मजबूत हुआ है.

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बख्शी स्टेडियम में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बोलते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा पूरी तरह बहाल करने की पुरजोर वकालत की. उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों को अधिकार दिए बिना भारत का संघवाद 'अधूरा' है और केंद्र का दखल लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाता है.

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2019 के फैसले की आलोचना की थी 

घाटी में मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, अब्दुल्ला ने इस ऐतिहासिक मंच का इस्तेमाल अगस्त 2019 के केंद्र के फैसलों की आलोचना करने और एक मजबूत संघीय ढांचे की मांग करने के लिए किया. उन्होंने कहा कि संघवाद को मजबूत करने की पहल जम्मू-कश्मीर से शुरू होनी चाहिए.

बीजेपी नेता और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने अनुच्छेद 370 को हटाने के मुद्दे पर बात करने के लिए स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल करने के मुख्यमंत्री के फैसले पर निशाना साधा. शर्मा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के फैसले ने 'एक देश, एक संविधान' के राष्ट्रीय आदर्श को लागू किया, जिससे यह क्षेत्र असल में बाकी भारत के साथ जुड़ गया और संघीय ढांचा मजबूत हुआ.

भ्रमित और निराशाजनक वाला भाषण बताया 

शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस करोड़ों भारतीयों के लिए राष्ट्रीय गौरव का पवित्र दिन है. उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने कामकाज और भविष्य की विकास योजनाओं पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक शिकायतों को जाहिर करने के लिए इस मंच का गलत इस्तेमाल किया.

विपक्ष के नेता ने टिप्पणी की कि मुख्यमंत्री अभी भी 2019 से पहले की राजनीतिक 'दुविधा' में जी रहे हैं और उनका भाषण "भ्रमित करने वाला और निराशाजनक" लगा. शर्मा ने दावा किया कि 2019 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर शांति, पर्यटन में बढ़ोतरी और विकास के एक नए दौर में दाखिल हुआ है, जिससे बांटने वाली राजनीतिक बातें बेमानी हो गई हैं.

विपक्ष के नेता की बातों के जवाब में, तनवीर सादिक समेत JKNC नेताओं ने तुरंत मुख्यमंत्री के रुख का बचाव करते हुए पूछा, "अगर आज [राज्य का दर्जा बहाल] नहीं किया गया, तो कब किया जाएगा?"

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