जम्मू-कश्मीर के 86 विधायकों ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) को राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया. जबकि एक वोट डाक मतपत्र के माध्यम से डाला गया. अब सभी की निगाहें आज शाम 5 बजे होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीडीपी, सीपीआईएम, आप, एआईपी और पांच निर्दलीय विधायकों का महागठबंधन चुनावों में भारी जीत हासिल करने और बीजेपी को एकमात्र सीट न जीतने देने के लिए तैयार हैं, जिस पर उसे आसानी से जीत की उम्मीद थी.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 86 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में मतदान किया. जबकि पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने मतदान में भाग नहीं लिया. बडगाम से उमर अब्दुल्ला के इस्तीफे और नगरोटा सीट पर देविंदर राणा के निधन के कारण दो सीटें खाली हैं.
सूत्रों ने पुष्टि की है कि आप विधायक मेहराज मलिक जो हिरासत में हैं, उनका डाक मतपत्र भी रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंच गया. उसे मतगणना में शामिल किया जाएगा. निर्वाचन अधिकारी ने कहा, "मतदान समाप्त हो गया है. लेकिन औपचारिक रूप से शाम 4:00 बजे मतदान बंद हो जाएगा."
नेशनल कॉन्फ्रेंस को कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, माकपा और निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलने के साथ विधायकों की संख्या 58 हो गई है. ये संख्या चारों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त हैं.
सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों और निर्दलीय विधायकों, खासकर शेख खुर्शीद और शब्बीर कुली के दावों को देखते हुए बीजेपी के एक भी सीट जीतने की संभावना कम ही नजर आती है. गठबंधन के पास तीसरी और चौथी सीट के लिए 29-29 वोट हैं, जबकि बीजेपी के पास अपने उम्मीदवार के लिए 28 वोट हैं.
हालांकि, बीजेपी केवल तभी सीट जीत सकती है जब गठबंधन के गुट - नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीडीपी या निर्दलीय - के विधायक क्रॉस-वोटिंग करें. पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का चुनाव से दूर रहने का फैसला मुख्य रूप से किसी भी क्रॉस-वोटिंग के दोष से बचने और एनसी और बीजेपी दोनों से खुद को दूर रखने की इच्छा से प्रेरित था.
