पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने बुधवार (28 अप्रैल) को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जम्मू - कश्मीर के साझा इतिहास से उर्दू भाषा को मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले राजस्व विभाग ने जुलाई 2025 में प्रणाली से उर्दू को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.
'अब्दुल्ला सरकार उर्दू को मिटाने की कोशिश कर रही'
इल्तिजा मुफ्ती ने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार, जम्मू-कश्मीर में समाज और समुदाय के हर वर्ग की भाषा उर्दू को धीरे-धीरे व्यवस्था से हटाने की कोशिश कर रही है.' इल्तिजा ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के प्रमुख के रूप में अब्दुल्ला ने एक आदेश जारी किया था कि राजस्व दस्तावेजों का डिजिटलीकरण केवल अंग्रेजी भाषा में ही होगा.
उन्होंने सवाल किया, "यह तब हुआ जब सदियों से हमारे सभी अभिलेख उर्दू में हैं. मैं अब्दुल्ला से पूछना चाहती हूं कि उन्होंने ऐसा आदेश क्यों जारी किया? यह जानते हुए भी कि सभी दस्तावेज उर्दू में हैं, यहां हरियाणा मॉडल क्यों थोपा गया और अंग्रेजी को क्यों आगे बढ़ाया गया?" इल्तिजा ने दावा किया कि राजस्व विभाग में भर्ती के लिए उर्दू अनिवार्य हुआ करती थी, लेकिन अब्दुल्ला सरकार ने उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है.
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उर्दू को हमारे इतिहास से क्यों मिटा रहे- इल्तिजा मुफ्ती
इल्तिजा मुफ्ती ने कहा, 'मेरी अब्दुल्ला से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन जो महाराजा के समय में या बीजेपी की इच्छा के बावजूद नहीं हुआ, तो वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? आपको उर्दू से क्या परेशानी है? आप उर्दू को हमारे साझा इतिहास से क्यों मिटा रहे हैं?'
पीडीपी नेता ने कहा, 'क्या जनता ने उन्हें हमारी भाषा, जो हमारी संस्कृति और पहचान का एक बड़ा हिस्सा है, को मिटाने के लिए इतना बड़ा जनादेश दिया है? क्या आप बीजेपी के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं?.' उन्होंने कहा, 'यह जम्मू-कश्मीर के युवाओं पर भी हमला है.'
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