जम्मू कश्मीर विधानसभा के हाल के सत्र में जिस नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष न केवल सदन में बल्कि सड़कों पर भी आमने-सामने थे. उस यूनिवर्सिटी को लेकर प्रदेश में अनिश्चितता के बादल छा गए है. दरअसल, इस यूनिवर्सिटी को लेकर प्रदेश में जम्मू बनाम कश्मीर बनाने की कोशिश की गई थी. जम्मू कश्मीर में हाल में हुई विधानसभा कार्यवाही के दौरान नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का मुद्दा छाया रहा. जहां नेशनल कांफ्रेंस इस लॉ यूनिवर्सिटी को श्रीनगर में बनाने के मूड में थी. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस लॉ यूनिवर्सिटी को जम्मू में स्थापित करने की मांग लगातार सदन और सड़क पर की. लेकिन, आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे किजो लॉ यूनिवर्सिटी यहां पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी का एक बड़ा मुद्दा थी उसे पर प्रदेश में अब अनिश्चित के बादल छाए हुए हैं.

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50 करोड़ रुपए आवंटित 

अगर इस लॉ यूनिवर्सिटी की बात करें तो इसको लेकर साल  2019 में कानून बनाया गया. जिसके बाद वर्ष  2025-26 के बजट में 50 करोड़ रुपये के आवंटन भी इस यूनिवर्सिटी के लिए किया गया. विधानसभा में इसे बनाने के लिए दबाव डालने वाले प्रस्ताव और सरकार के अप्रैल 2026 तक इसे चालू करने के वादे के बावजूद अनिश्चितता में फंसा हुआ है.

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सूत्रों ने बताया है कि जिस यूनिवर्सिटी को स्थापित करने को लेकर नेशनल कांफ्रेंस और विपक्षी भाजपा के अपने-अपने तर्क थे उसे यूनिवर्सिटी को लेकर अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि यह संस्थान सिर्फ श्रीनगर में बनेगा या जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों में. इस यूनिवर्सिटी को लेकर अनिश्चिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस यूनिवर्सिटी के रेगुलेटरी अप्रूवल लेने की शुरुआती फॉर्मैलिटी भी अभी तक रुकी हुई हैं, जिससे प्रोजेक्ट में और लंबी देरी हो सकती है.

रिसर्च के बाद सरकार को सौंपा था ब्लूप्रिंट 

गौरतलब है कि इस लॉ यूनिवर्सिटी को बनाने को लेकर जम्मू कश्मीर सरकार ने इस लॉ यूनिवर्सिटी को बनाने से पहले देश भर में चल रही अलग-अलग लॉ यूनिवर्सिटीज के मॉडल को समझ कर एक ब्लूप्रिंट सरकार को सौंपा था. इस ब्लूप्रिंट में लॉ यूनिवर्सिटी के मेनपावर और मिनिमम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों का भी अनुमान लगाया गया था. इसके अलावा, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का परमानेंट कैंपस बनाने के लिए ज़रूरी कम से कम एरिया, शुरुआती स्टेज में शुरू किए जाने वाले कोर्स और स्टूडेंट्स की इनटेक कैपेसिटी भी बताई गई. इस ब्लूप्रिंट के बावजूद फिलहाल सरकार या संबंधित विभाग की तरफ से इस लॉ यूनिवर्सिटी को कहां बनाया जाए इस पर फैसला नहीं हो सका है. 

स्थान को लेकर अभी भी संशय 

यहां यह समझना अरूरी है कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया से मान्यता लेने और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन से ग्रांट के लिए एलिजिबिलिटी के साथ-साथ एकेडमिक वैलिडिटी पक्की करने के लिए टेम्पररी जगह की जल्द पहचान और अलॉटमेंट ज़रूरी है. इस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए जरूरी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएँ शुरू करने से पहले इस बात पर फैसला लेना जरूरी है कि यह यूनिवर्सिटी आखिर जम्मू कश्मीर में बनेगी कहां जिस पर अभी तक फैसला नहीं हो पाया है.

 हालांकि अब जम्मू कश्मीर से यह मांगतीउठने लगी है कि जिस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आपस में बैठ गए थे उसे मुद्दे के निपटारे के लिए जम्मू और श्रीनगर दोनों जगह एक-एक लॉ यूनिवर्सिटी दी जाए.

इस लॉ यूनिवर्सिटी को जम्मू में बनाने को लेकर जहां बीजेपी तक दे रही थी कि जम्मू में भूगोल की स्थितियां, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, मौसम और सुरक्षा जहां देश भर के विद्यार्थियों के लिए अनुकूल है. वही नेशनल कांफ्रेंस का दावा था कि इस बात की क्या गारंटी है कि अगर यह लॉ यूनिवर्सिटी जम्मू में बने और यहां पर गैर हिंदू छात्र अधिक एडमिशन ले ले तो इसका हश्र श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एक्सीलेंस जैसा ना हो.

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