जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (8 जनवरी) को स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी पहल 'ई-पाठशाला' का शुभारंभ किया. इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य क्लासरूम टीचिंग को मजबूती देना और छात्रों के बीच सीखने के अंतर (Learning Gap) को कम करना है.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 'ई-पाठशाला' पूरे केंद्र शासित प्रदेश में DTH चैनल 53 पर उपलब्ध होगी. उन्होंने समग्र शिक्षा योजना के तहत कई नए हॉस्टल भवनों और विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया. अब्दुल्ला ने अपना विजन साझा करते हुए कहा कि भविष्य में उनकी सरकार हर क्लास के लिए एक डेडिकेटेड चैनल बनाने की दिशा में काम करेगी.
शिक्षक का स्थान कोई तकनीक नहीं ले सकती
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की अहमियत पर भी जोर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि ई-क्लासरूम शिक्षकों की भूमिका कम करने के लिए नहीं हैं. उन्होंने कहा, "एक शिक्षक और छात्र के बीच के रिश्ते को कोई भी डिवाइस या टेक्नोलॉजी नहीं बदल सकती. शिक्षकों को बदलने का हमारा कोई इरादा नहीं है, क्योंकि वे अपरिहार्य हैं."
मुख्यमंत्री ने सुनाया अपना दिलचस्प किस्सा
अच्छे शिक्षकों की शक्ति को समझाने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने बचपन की एक याद साझा की. उन्होंने बताया कि बचपन में वे साइंस में काफी कमजोर थे और उनके माता-पिता को उनके फेल होने का डर था.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "श्रीनगर के एक शिक्षक सत लाल राजदान साहब ने मेरी जिंदगी बदल दी. वे इतने सख्त और काबिल थे कि उन्होंने मुझे ट्यूशन के लिए अपने घर बुलाया. उनके मार्गदर्शन की बदौलत मैंने साइंस में अपनी उम्मीद से कहीं ज्यादा नंबर हासिल किए. एक अच्छा शिक्षक सबसे कमजोर छात्र को भी ऊंचाइयों पर ले जा सकता है."
दूरदराज के इलाकों को मिलेगा विशेष लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 20 में से 14 जिले साक्षर हो चुके हैं, लेकिन बाकी 6 जिले काफी दूरदराज के इलाकों में हैं. 'ई-पाठशाला' चैनल का सबसे बड़ा फायदा इन्हीं दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा. उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि कंटेंट को उपयोगी बनाए रखने के लिए छात्रों और शिक्षकों से लगातार फीडबैक लिया जाए.
तकनीक और किताबों के बीच संतुलन की सलाह
स्मार्टफोन और स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त करते हुए अब्दुल्ला ने छात्रों को सलाह दी कि वे मोबाइल का इस्तेमाल गेमिंग के बजाय सीखने और दिमागी कसरत के लिए करें. उन्होंने बच्चों से टेक्स्टबुक के साथ-साथ मैगजीन और अखबार पढ़ने की आदत डालने की भी अपील की.