जम्मू और कश्मीर सरकार ने गर्मियों के मौसम 2026 के लिए जम्मू से श्रीनगर तक कार्यालयों के सालाना 'दरबार मूव' की तारीखों का आदेश जारी किया है. इसके साथ ही, सरकार ने कार्यालयों के बंद होने, फिर से खुलने, परिवहन, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़ा एक विस्तृत कार्यक्रम और दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.

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'दरबार मूव' एक 150 साल पुरानी, साल में दो बार होने वाली प्रथा है. इसके तहत जम्मू और कश्मीर की दो राजधानियों श्रीनगर (गर्मियों की राजधानी) और जम्मू (सर्दियों की राजधानी) के बीच सरकारी सचिवालय और अन्य सभी जरूरी कार्यालयों को स्थानांतरित किया जाता है. इस व्यवस्था के तहत, सर्दियों के महीनों में सरकारी कार्यालय जम्मू में काम करते थे और गर्मियों के लिए श्रीनगर चले जाते थे.

सरकारी आदेश संख्या 786-JK(GAD) (2026) दिनांक 15 अप्रैल के अनुसार, जो कार्यालय पांच दिन का कार्य-सप्ताह अपनाते हैं. वे 30 अप्रैल को काम के घंटों के बाद जम्मू में बंद हो जाएंगे. जबकि छह दिन का कार्य-सप्ताह वाले कार्यालय 2 मई को बंद होंगे. सभी कार्यालयों का श्रीनगर में 4 मई से फिर से काम शुरू करने का कार्यक्रम तय किया गया है.

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हर काफिले के साथ रहेंगी एक क्रेन और दो बसें

आदेश में कहा गया है कि 'कैंप' (स्थानांतरण दल) के हिस्से के रूप में जाने वाले कार्यालय अपने कुल कर्मचारियों की संख्या का 33 प्रतिशत तक या अधिकतम 10 कर्मचारियों को ही अपने साथ ले जा सकेंगे. इन दोनों में से जो भी संख्या कम होगी, उसे ही माना जाएगा. जम्मू और कश्मीर सड़क परिवहन निगम (JKRTC) को 1 मई और 3 मई को पर्याप्त बस सेवाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इन बसों के लिए टिकटों की अग्रिम बुकिंग 20 अप्रैल से शुरू हो जाएगी.

हर काफिले के साथ एक क्रेन, दो खाली बसें और मोबाइल वर्कशॉप (चलती-फिरती मरम्मत गाड़ियां) रहेंगी, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी खराबी या रुकावट को तुरंत ठीक किया जा सके. जम्मू और कश्मीर पुलिस सुरक्षा एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) प्रदान करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग और बनिहाल-काजीगुंड सुरंग जैसी प्रमुख सुरंगों से होकर काफिला बिना किसी रुकावट के गुजर सके. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर झज्जर कोटली, उधमपुर, चेनानी, रामबन, रामसू, बनिहाल और काजीगुंड में चिकित्सा सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे.

अधिकारियों ने बताया कि इस आगामी स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत, प्रमुख विभागों और उनके कर्मचारियों को गर्मियों की राजधानी (श्रीनगर) में भेजा जाएगा. जिससे श्रीनगर से ही शासन-प्रशासन का काम बिना किसी रुकावट के जारी रह सके. इस स्थानांतरण प्रक्रिया को सुचारू और समय पर पूरा करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं.

क्षेत्रीय संतुलन का प्रतीक माना जाता है ‘दरबार मूव’

ऐतिहासिक रूप से 'दरबार मूव' को जम्मू और कश्मीर संभागों के बीच क्षेत्रीय संतुलन का प्रतीक माना जाता रहा है. हालांकि, यह प्रथा कई तरह की लॉजिस्टिक (प्रबंधकीय) चुनौतियों से भी जुड़ी रही है. जिनमें सरकारी रिकॉर्ड का परिवहन, कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था और रोजमर्रा के कामकाज में आने वाली रुकावटें शामिल हैं. हालांकि सरकार ने पहले भौतिक आवाजाही को कम करने के लिए इस प्रथा की जगह "दोहरी सचिवालय" प्रणाली और डिजिटल फाइल प्रबंधन लागू किया था. लेकिन इस बदलाव को कम से कम आंशिक रूप से फिर से शुरू करने के फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सबका ध्यान खींचा है.

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उमर अब्दुल्ला सरकार ने इस प्रथा को फिर से किया बहाल

दोनों क्षेत्रों के बीच प्रशासनिक और सांस्कृतिक दूरियों को पाटने के लिए महाराजा रणबीर सिंह द्वारा 1872 में शुरू की गई इस प्रथा को अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रशासन ने समाप्त कर दिया था. इसके पीछे उन्होंने वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए कहा था कि इससे सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत होगी और वे कागज-रहित "ई-ऑफिस" संचालन की ओर बढ़ सकेंगे. हालांकि, नवंबर 2025 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने इस प्रथा को फिर से बहाल कर दिया. चुनावी वादों के तहत इस परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेते हुए, चार साल तक निलंबित रहने के बाद इस प्रथा को फिर से शुरू किया गया.

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