नेशनल कॉन्फ्रेंस से अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि इस्लाम शांति और भाईचारा सीखाता है. यही मैसेज दिया जाता है. उन्होंने कहा कि यही संदेश इमाम हुसैन भी लेकर गए थे. अत्याचार और बुराई के खिलाफ लड़ना, कर्बला इसी को बताता है.
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "कर्बला वो जगह जिसने इस्लाम को उम्मीद दी कि हम सभी मुश्किलों के बावजूद जीवित रहेंगे और कोई भी इस्लाम को हरा नहीं पाएगा."
शिया समुदाय के हजारों लोगों ने निकाला जुलूस
बता दें कि रविवार (6 जुलाई) को श्रीनगर में शिया समुदाय के हजारों लोगों ने मुहर्रम के दसवें दिन पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत की याद में आशूरा जुलूस निकाला.
उपराज्यपाल ने पानी बांटा
जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जुलूस शुरू होने से पहले शहर के लाल बाजार क्षेत्र में बोटा कदल का दौरा किया.उपराज्यपाल ने बोटा कदल से शुरू होकर जदीबल इमामबाड़ा तक पहुंचने वाले जुलूस से पहले शिया समुदाय के लोगों में पानी बांटा.
एक्स पोस्ट में क्या बोले उपराज्यपाल?
उपराज्यपाल ने एक्स पर एक पोस्ट में इमाम हुसैन और उनके बलिदान को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लिखा, "यौम-ए-आशूरा के पावन अवसर पर, श्रीनगर के डाउनटाउन में बोटाकदल में जुलजिनाह जुलूस में शामिल हुआ और हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों को श्रद्धांजलि दी. उनके शांति, प्रेम और करुणा के लिए किए गए बलिदान हमें समानता और सद्भाव पर आधारित समाज बनाने के लिए प्रेरित करते हैं. हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) ने निःस्वार्थ सेवा का संदेश दिया और मानवता को कमजोर वर्गों की देखभाल करने का मार्गदर्शन किया. युवा पीढ़ी को हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जीवन और गुणों से सीखना चाहिए और उनके दिखाए गए धर्मनिष्ठ मार्ग पर चलना चाहिए."
अधिकारियों ने बताया कि मुहर्रम जुलूस को लेकर पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई थीं. मार्ग पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था, जबकि पुलिस और वॉलंटियर्स ने पानी वितरित करने के लिए स्टॉल लगाए थे. अधिकारियों ने बताया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए मार्ग पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों को भी तैनात किया गया था.