जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है. फारूक अब्दुल्ला ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वह डिक्सन प्लान को लागू करने के छिपे हुए एजेंडे पर काम कर रही हैं. फारूक अब्दुल्ला ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर के और विभाजन का वह सिरे से विरोध करते हैं.

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दरअसल, महबूबा मुफ़्ती ने एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर में और जिले बनाने के साथ-साथ पीर पंजाल और चेनाब घाटी को अलग डिविजन का दर्जा देने की मांग की थी. इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे सुझाव राज्य को कमजोर करने की दिशा में हैं. उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से अलग होने के बावजूद वहां के लोगों को आज तक कोई खास फायदा नहीं मिला.

'पीडीपी पहले सत्ता में थी, तब क्या किया?'

जम्मू में फारूक अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ़्ती पर पलटवार करते हुए कहा, “वे भी सत्ता में थीं, उनके वालिद भी मुख्यमंत्री रहे. तब उन्होंने क्या किया? उंगली उठाना बहुत आसान है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि तीन उंगलियां खुद की तरफ भी इशारा करती हैं.” उन्होंने नए ज़िलों के गठन की संभावना को भी फिलहाल खारिज कर दिया.

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पाकिस्तान पर साधा निशाना

फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कभी डोनाल्ड ट्रंप के साथ अच्छे संबंध थे, लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं रहे हैं. उनके मुताबिक, बदलते वैश्विक समीकरणों को भी समझने की जरूरत है.

बेरोजगारी और एनसी पर आरोपों का जवाब

महबूबा मुफ़्ती द्वारा बेरोजगारी बढ़ने के आरोप पर फारूक अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि जब वह खुद मुख्यमंत्री थीं, तब बेरोजगारी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए.

वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के उस बयान पर भी उन्होंने जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस शांति भंग करना चाहती है. फारूक ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं और उसे किसी से प्रमाण-पत्र लेने की ज़रूरत नहीं.

उधर, महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि पीर पंजाल क्षेत्र के लोगों को अपनी बुनियादी प्रशासनिक समस्याओं के लिए जम्मू और श्रीनगर के चक्कर नहीं लगाने चाहिए. उनके मुताबिक, इस क्षेत्र को डिविजन का दर्जा और डिविजनल कमिश्नर स्तर का अधिकारी मिलने से आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.