पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भारत के युवाओं को बधाई दी है. उन्होंने इसे विरोध के लोकतांत्रिक और गांधीवादी तरीकों की जीत बताया. श्रीनगर में उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने का श्रेय नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के लगातार और शांतिपूर्ण आंदोलन को जाता है.

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महबूबा मुफ्ती ने छात्रों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बिना हिंसा किए, भूखे-प्यासे रहकर भी एक महीने से ज्यादा समय तक अपना विरोध जारी रखा. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं और सरकार को न सिर्फ़ उनकी सभी मांगें पूरी करनी चाहिए, बल्कि उन पर हुई हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ की गई बदसलूकी के लिए माफी भी मांगनी चाहिए.

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'छात्र हिंदू-मुस्लिम राजनीति से गुमराह नहीं हुए'

महबूबा मुफ्ती ने कहा, "छात्र देश में आज हो रही हिंदू-मुस्लिम राजनीति से गुमराह नहीं हुए. उन्होंने हम कश्मीरियों का स्वागत किया, जिन्हें बुरा-भला कहा गया और आतंकवादी बताया गया, और सबसे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. इन छात्रों ने लोकतंत्र में देश का भरोसा फिर से जगाया है."

उन्होंने आगे कहा कि इस आंदोलन ने दिखाया है कि गांधी का भारत अपनी जगह वापस पा रहा है और युवा पीढ़ी ने गहरी ध्रुवीकरण वाली या बांटने वाली सांप्रदायिक राजनीति को पूरी तरह से नकार दिया है.

उनके मुताबिक, इस आंदोलन ने बड़े पैमाने पर फैले "डर के माहौल" को चुनौती दी और यह साबित किया कि सवाल पूछना ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है.

NEET-UG विवाद के बाद हुआ इस्तीफा

गौरतलब है कि NEET-UG 2026 जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था. इसी बीच शनिवार दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

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जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन, जिसमें महबूबा मुफ़्ती भी शामिल हुई थीं, को शनिवार शाम सरकार द्वारा उनकी मुख्य मांगें औपचारिक रूप से मान लिए जाने के बाद समाप्त कर दिया गया. इसके बाद महबूबा मुफ़्ती ने इसे युवाओं की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताया और आंदोलन में शामिल सभी छात्रों को बधाई दी.