जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईद-उल-अजहा के बाद 18 महीने से ज्यादा समय तक शांत रहने के बाद राजनीतिक चर्चा में बदलाव का संकेत दिया है. उमर ने कहा कि वह ईद के बाद एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अभी खुद को रोक रहे हैं, क्योंकि यह मौका राजनीतिक भाषण देने के लिए सही नहीं था.
गुलमर्ग के तंगमर्ग इलाके में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, J&K के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह शैक्षणिक माहौल राजनीतिक टिप्पणियां करने के लिए उचित नहीं था. उन्होंने कहा कि मेरा यकीन कीजिए, मैं बादल फटने की तरह बरसना चाहता हूं. उन्होंने आगे कहा कि वह ईद के बाद एक सार्वजनिक सभा में खुलकर अपनी बात रखेंगे.
BJP का जिक्र कर CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, 'पश्चिम बंगाल में एक बहुत बड़ी...'
CM पर लगे बीजेपी के इशारों पर काम करने के आरोप
सीएम जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर मुखर रहे हैं. साथ ही केंद्र में मोदी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के साथ उनके संबंध सौहार्दपूर्ण रहे हैं. इतने कि विपक्ष ने उन पर BJP के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया है. लेकिन पुनर्गठन विधेयक की हार, महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे और पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद, उमर अब्दुल्ला ने अपना राजनीतिक लहजा बदल लिया है.
उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर संभावित बगावत की अफवाहों को खारिज कर दिया. ऐसी चर्चा थी कि कम से कम सात विधायक पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उमर ने कहा कि ये महज अटकलें हैं. सीएम ने कहा कि क्या आपको लगता है कि अगर मेरे विधायक पार्टी छोड़ रहे होते, तो मैं इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होता?
सीएम ने बताया कि ये अफवाहें उन्हीं लोगों ने फैलाई हैं, जिन्होंने पिछले साल राज्यसभा चुनावों में BJP के इशारे पर काम किया था. उन्होंने PDP का नाम तो नहीं लिया, लेकिन RTI से यह खुलासा होने के बाद कि PDP ने राज्यसभा चुनावों के लिए कोई पोलिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया था, उस पर ही ये आरोप लगाए जा रहे थे.
पश्चिम बंगाल के नतीजों पर की समीक्षा की मांग
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर SIR (राज्य पुनर्गठन अधिनियम) और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप न करने के संभावित असर पर टिप्पणी करते हुए, उमर ने पूरे देश में चुनावी नतीजों की समीक्षा करने की मांग की. उमर अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में एक बहुत बड़ी गलती हुई है, और कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता.
उन्होंने कहा कि बहुत सारे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. और कोर्ट ने कहा है कि हम चुनावों के बाद इस मामले की सुनवाई करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि अब सुनवाई करने का क्या फायदा? चुनाव तो खत्म हो चुके हैं, और उन लोगों को वोट डालने का मौका ही नहीं मिला. अगर BJP जीतना चाहती थी, तो वह जीत गई.
सीएम ने यह भी कहा कि हमें इंतजार करके देखना होगा कि देश के बाकी हिस्सों में क्या होता है. शासन और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र जम्मू और कश्मीर के भविष्य के केंद्र में हैं और सरकार शिक्षा, रोजगार और आर्थिक अवसरों को मजबूत करने के लिए काम कर रही है.
निजी विश्वविद्यालयों की कमी को उजागर किया
उन्होंने इस क्षेत्र में पर्याप्त निजी विश्वविद्यालयों की कमी को उजागर किया, जिसके कारण परिवारों को अपने बच्चों को भारी आर्थिक खर्च पर जम्मू और कश्मीर से बाहर भेजना पड़ता है. इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार ने एक 'निजी विश्वविद्यालय विधेयक' पारित किया है और इसके कार्यान्वयन के लिए नियम बनाए जा रहे हैं.
सीएम ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि पूरे क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय खुलेंगे, और तांगमर्ग जैसी जगहों पर इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलेंगी. रोजगार के मुद्दे पर, उमर ने स्वीकार किया कि केवल सरकारी नौकरियां ही बेरोजगारी की समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर सकतीं, लेकिन उन्होंने कहा कि राहत देने के लिए इस साल 20,000 से 25,000 सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा गया है.
सीएम ने 'मिशन युवा' योजना का किया जिक्र
उमर अब्दुल्ला ने 'मिशन युवा' जैसी स्वरोजगार पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य युवा उद्यमियों जिनमें पर्यटन और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोग भी शामिल हैं. उनके लिए ऋण (लोन) तक पहुंच को बेहतर बनाना है. उन्होंने आगे कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है ताकि प्रशिक्षण को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापक लक्ष्य एक आत्मनिर्भर जम्मू और कश्मीर का निर्माण करना है, जिसकी स्थानीय आर्थिक नींव मजबूत हो; ऐसा करके क्षेत्र के भीतर ही अवसर पैदा किए जा सकेंगे और केंद्र सरकार पर लंबे समय से चली आ रही निर्भरता को कम किया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा दिन देखना चाहते हैं जब हम अपने पैरों पर खड़े हो सकें. साथ ही यह भी जोड़ा कि शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार किए जाने वाले प्रयास इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे.
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