भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता, सुनील शर्मा ने आने वाले दिनों में उमर अब्दुल्ला सरकार के गिरने की भविष्यवाणी की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में फूट पड़ रही है और सरकार के भीतर भारी उथल-पुथल मची हुई है. उन्होंने कहा कि एक 'डूबते जहाज' को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.
सुनील शर्मा ने 3 जून की बैठक को आखिरी मौका बताया
सुनील शर्मा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा 3 जून को बुलाई गई एक बैठक पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें सत्ताधारी पार्टी के सभी विधायकों और कम से कम 4 निर्दलीय विधायकों को आमंत्रित किया गया था. शर्मा ने कहा, 'कल शाम से ही हम सोशल मीडिया पर देख रहे हैं कि 3 जून को हमारे 'वजीर-ए-आला' ने एक बैठक बुलाई है. मुझे लगता है कि यह डूबते जहाज को बचाने की आखिरी कोशिश है. इसे बचाने का यह आखिरी मौका है.'
BJP नेता ने दावा किया कि 3 जून की बैठक से जुड़ा एक संदेश शनिवार से ही सोशल मीडिया पर घूम रहा है और उन्होंने संकेत दिया कि यह कथित पहल सत्ताधारी खेमे के भीतर की आंतरिक समस्याओं को सुलझाने के उद्देश्य से की गई है. शर्मा ने कहा, 'मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं. मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि कोई परिवार या पार्टी ढहने की कगार पर है. मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इसे बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं.'
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सीएम शासन-प्रशासन पर ध्यान देने के बजाय सत्ता बचाने में व्यस्त
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शासन-प्रशासन पर ध्यान देने के बजाय अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने में ही पूरी तरह से व्यस्त हो गए हैं. शर्मा ने आरोप लगाया, 'वही 'लापता' मुख्यमंत्री, जिनसे जम्मू-कश्मीर की जनता को कुछ उम्मीदें थीं, आज डिनर पार्टियों से लेकर 3 जून की बैठक तक, सिर्फ अपना घर और अपनी कुर्सी बचाने में ही व्यस्त हैं.' यह दावा करते हुए कि सत्ताधारी खेमे के भीतर की दरारें और गहरी हो गई हैं, शर्मा ने कहा कि कितनी भी बैठकें कर ली जाएं, उनसे सरकार में स्थिरता वापस नहीं आ पाएगी.
उन्होंने कहा, 'वे कितनी भी बैठकें क्यों न कर लें, उनका घर टूट चुका है. हर कोई अब बस इस खबर का इंतजार कर रहा है कि सरकार गिर गई है.' शर्मा ने आगे बढ़ते हुए सरकार के गिरने की भविष्यवाणी की और दावा किया कि सरकार के पतन से जुड़ी खबरें बहुत जल्द सामने आ सकती हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि आपके चैनलों के माध्यम से हमें बहुत जल्द यह खबर सुनने को मिलेगी कि यह सरकार अब और नहीं रही.'
'अब्दुल्ला परिवार की सात पीढ़ियां भी कभी इस्तीफा नहीं देंगी.'
इस अटकल पर प्रतिक्रिया देते हुए कि क्या उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, शर्मा ने जोर देकर कहा कि अब्दुल्ला परिवार कभी भी अपनी मर्जी से सत्ता नहीं छोड़ेगा. 'जो लोग मुख्यमंत्री के इस्तीफे की बात कर रहे हैं, उन्हें मेरी भविष्यवाणी याद रखनी चाहिए. अब्दुल्ला परिवार की सात पीढ़ियां भी कभी इस्तीफा नहीं देंगी.'
उन्होंने आगे दावा किया कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति में किसी भी संस्थागत गिरावट के बावजूद उमर अब्दुल्ला अपने पद पर बने रहेंगे. 'अगर, खुदा न करे, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कश्मीर स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद बन जाती है, तब भी कार्यकारी पार्षद के तौर पर उमर अब्दुल्ला इस्तीफा नहीं देंगे,' शर्मा ने कहा.
शर्मा ने अब्दुल्ला परिवार पर सत्ता-लोभी होने का लगाया आरोप
अपने सबसे तीखे हमलों में से एक में, शर्मा ने अब्दुल्ला परिवार पर सत्ता-लोभी होने का आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक घरानों ने जम्मू-कश्मीर में अशांति का फायदा अपने राजनीतिक लाभ के लिए उठाया है. शर्मा ने कहा, 'वह परिवार जो सत्ता का भूखा है, वह परिवार जिसने दशकों तक जम्मू-कश्मीर को सताया है, क्या वह इस्तीफा देगा? किसी भी कीमत पर नहीं.'
उन्होंने दावा किया कि अगर जम्मू-कश्मीर का दर्जा घटाकर केंद्र शासित प्रदेश से भी नीचे कर दिया जाए, तब भी वहां का नेतृत्व तब तक सत्ता में बना रहेगा, जब तक उनके सरकारी विशेषाधिकार सुरक्षित रहेंगे. शर्मा ने आरोप लगाया, 'वे कहते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा तो छोड़िए, उससे भी नीचे का कोई दर्जा हो, तब भी वे वहीं बने रहेंगे; बशर्ते उनके प्रोटोकॉल, गाड़ियों और विशेषाधिकारों में कोई कटौती न हो.'
अपनी सीटें बचाने के चक्कर में राज्य को दशकों तक झेलना पड़ा कष्ट
उन्होंने आरोप लगाया, 'यह दो परिवारों के 'राजकुमारों और राजकुमारियों' को सत्ता की कुर्सी पर बनाए रखने के लिए चलाया गया एक तथाकथित आंदोलन था. अपनी सीटें बचाने के चक्कर में जम्मू-कश्मीर को दशकों तक कष्ट झेलना पड़ा.' उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान हजारों कश्मीरी युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी.
BJP नेता ने बार-बार यह बात दोहराई कि सत्ताधारी दल एक राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन चर्चा का विषय बनी 3 जून की बैठक, उनके शब्दों में, राजनीतिक एकता को बचाए रखने का एक 'अंतिम प्रयास' है. शर्मा ने दावा किया, 'इस परिवार की बर्बादी दुनिया के सामने नहीं आनी चाहिए. इसी मकसद से, 3 जून की यह बैठक उनका आखिरी प्रयास है.'
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