जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने की सात साल पूरे होने पर पर सुरक्षा के एहतियाती उपाय के तौर पर, 5 अगस्त 2026 को अमरनाथ यात्रा के काफिलों को एक दिन के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. अधिकारियों ने जम्मू से बालटाल बेस कैंप की ओर जाने वाले और बालटाल से जम्मू लौटने वाले सभी नए यात्री काफिलों को रोक दिया.

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हालांकि, जो यात्री इस रोक से पहले ही बेस कैंप पहुंच चुके थे, उन्हें तय और नियंत्रित तरीके से पवित्र गुफा मंदिर तक अपनी यात्रा जारी रखने और दर्शन करने की अनुमति है. यह अस्थायी रोक सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लगाई गई है. यह जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा इस मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किए गए सामान्य और स्थानीय एहतियाती उपायों का हिस्सा है.

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एहतियात के तौर पर लगाई गई पाबंदी

अधिकारियों ने कहा कि यात्रा नियंत्रित तरीके से जारी है. केवल नए और लौटने वाले काफिलों की आवाजाही को एहतियाती उपाय के तौर पर रोका गया है, क्योंकि इस दिन कई राजनीतिक कार्यक्रम और मार्च प्रस्तावित हैं, जबकि अधिकारियों ने इनकी अनुमति नहीं दी है और पाबंदियां लगाई हैं.

जहां बीजेपी आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने को 'एकात्म महोत्सव' के तौर पर मना रही है और बाइक रैलियां व अन्य जश्न के कार्यक्रम आयोजित कर रही है, वहीं कांग्रेस ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 'काला दिन' करार दिया है.

राजनीतिक दलों का विरोध

महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेगी. गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली डीपीएपी ने घोषणा की है कि वे जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने और पूर्व राज्य का दर्जा खत्म करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे. वहीं, सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी मुख्यालय से विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है.

2019 में हटाई गई थी धारा 370 

बता दें कि 5 अगस्त साल 2019 में धारा 370 हटा दी गई थी. आर्टिकल 35ए ने राज्य के स्थायी निवासियों को खास अधिकार और सुविधाएं भी दी थीं. 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने का फैसला किया. इसके बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन हुआ और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बन गए.

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