हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट ले चुका है. शिंकुला दर्रे सहित लाहुल-स्पीति के कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी हुई है, जिससे पूरे इलाके में ठंड अचानक बढ़ गई है.

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जानकारी के अनुसार, मनाली, रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रों में लगातार हिमपात जारी है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है. मंडी में सुबह घना कोहरा छाया रहा, जबकि ताबो, रिकांगपिओ और कुफरी में तेज़ हवाएं चलीं, जिनकी रफ्तार 43 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई.

ठंड बढ़ने से तापमान में देखी जा रही करीब तीन डिग्री गिरावट

लाहुल-स्पीति में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे पहुंच गया है. कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान -6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि ताबो में यह -1.8 डिग्री सेल्सियस रहा. दूसरी तरफ बिलासपुर जिले में अधिकतम तापमान 25.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक था. निचले क्षेत्रों में भी ठंड बढ़ गई है और तापमान में करीब तीन डिग्री की गिरावट देखी जा रही है. किन्नौर की पहाड़ियों में हल्का हिमपात हुआ है और कई जगहों पर झरनों का पानी जमने लगा है.

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विभाग ने बिलासपुल और मंडी में दी घने कोहरे की चेतावनी

मौसम विभाग ने 9 और 10 दिसंबर को बिलासपुर और मंडी में घने कोहरे की चेतावनी दी है. विभाग का अनुमान है कि 14 दिसंबर तक हिमाचल में मौसम साफ बना रहेगा. हालांकि, पिछले एक महीने से बारिश न होने की वजह से राज्य के कई हिस्सों में कृषि पर असर पड़ा है और किसान चिंतित हैं. मनाली और सोलंग घाटी में दिनभर बादल छाए रहे. पर्यटक गतिविधियां धीमी हो गई हैं, लेकिन बर्फबारी देखने आए सैलानियों का उत्साह कम नहीं हुआ. शिमला में हालांकि धूप खिली, जिससे लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली.

मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग आधिकारिक रूप से बंद

इस बीच, हिमपात और सड़क पर बढ़ी फिसलन को देखते हुए प्रशासन ने 428 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है. हर साल की तरह, यह मार्ग अब अगले साल गर्मियों में दर्रों से बर्फ हटने के बाद ही खोला जाएगा. यह सड़क लद्दाख को हिमाचल से जोड़ने वाली अहम लाइफलाइन है, जहां से सेना की आवाजाही, आवश्यक सामान की सप्लाई और पर्यटन गतिविधियां संचालित होती हैं.

प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड का असर इतना बढ़ गया है कि प्राकृतिक जलस्रोतों, झरनों और नालों का पानी जमने लगा है. स्थानीय लोगों के लिए यह मौसम कठिनाइयां लेकर आया है, जबकि पर्यटन उद्योग के लिए बर्फबारी उम्मीदों की नई किरण मानी जा रही है.

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