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शिमला बाईपास के चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन और टनल निर्माण कार्य के कारण स्थानीय रिहायशी इमारतों पर संकट गहरा गया है. शनिवार, 9 जनवरी की रात को एक इमारत में दरारें दिखने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) हरकत में आ गया है. NHAI ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और हर संभव मदद मुहैया करवाई जा रही है.

घटना के तुरंत बाद NHAI द्वारा एक 'जॉइंट बिल्डिंग सर्वे' किया गया. सर्वे रिपोर्ट में संबंधित बिल्डिंग में हल्की से मध्यम दर्जे की दरारें पाई गई हैं. प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से प्रभावित इमारतों को पहले ही खाली करवा लिया है. राहत की बात यह है कि प्रभावित लोगों के लिए किराए पर रहने की उचित व्यवस्था NHAI द्वारा कर दी गई है.

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दो इमारतों के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज

NHAI के अनुसार, प्रभावित स्थल के साथ लगती दो अन्य इमारतों के अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है. इनमें से एक इमारत के लिए मुआवजे की राशि घोषित की जा चुकी है, जबकि दूसरी इमारत के अधिग्रहण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है.

तकनीकी निगरानी और 'बाय रिफ्लेक्स टारगेट'

भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए प्रोजेक्ट के कंसेशनायर (ठेकेदार) को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि इमारतों की स्थिति पर नजर रखने के लिए 'बाय रिफ्लेक्स टारगेट' लगाए गए हैं. इनकी रीडिंग लगातार लेने और अतिरिक्त टारगेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमीन या मलबे के खिसकने का तुरंत पता चल सके.

आबादी वाले इलाकों में ब्लास्टिंग पर रोक

स्थानीय निवासियों ने टनल निर्माण के लिए की जा रही ब्लास्टिंग (Blasting) पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. हालांकि विभाग का दावा है कि ब्लास्टिंग 'कंट्रोल्ड' तरीके से की जा रही थी, लेकिन जनहित को ध्यान में रखते हुए अब घनी आबादी वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की ब्लास्टिंग न करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

सुरक्षा के लिए उचित कार्रवाई का भरोसा

NHAI के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सर्वे की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर इलाके के निवासियों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए सभी उपयुक्त कदम उठाए जाएंगे. सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.