Himachal Pradesh: बात चाहे आग उगलते सूरज के नीचे 50 डिग्री तापमान में खड़े रहने की हो या हड्डी गला देने वाली ठंड वाले माइनस डिग्री तापमान की. भारतीय सेना के जवान हर परिस्थिति में सीमा को सुरक्षित रखने के लिए अपना जीवन तक कुर्बान कर देते हैं. भारतीय सैनिकों का जीवन परिवार के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए समर्पित होता है. आम जनता भी भारतीय सेना को नजदीक से जान सके, इसके लिए 'नो योर आर्मी' कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है.

'नो योर आर्मी' कार्यक्रम शिमला स्थित सी प्रशिक्षण कमान की ओर से आयोजित हो रहा है. शिमला में यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. जैसा कि कार्यक्रम के नाम से ही स्पष्ट है, इसके जरिए लोग भारतीय सेवा को नजदीक से जान सकेंगे.

सेना दिवस पर खास कार्यक्रम का आयोजन

'नो योर आर्मी' कार्यक्रम में 15 जनवरी को आर्मी हेरिटेज म्यूजियम में सेना के हथियार और उपकरणों को प्रदर्शित किया जाएगा. यहां भारतीय सेना के उपकरणों को आम जनता भी देखने के साथ उसके बारे में जान सकेगी. 16 जनवरी को ऐसा ही एक आयोजन रिज मैदान पर भी होगा. इस दिन कार्यक्रम में बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता के साथ एक्टेंपोर स्पीच प्रतियोगिता भी आयोजित होगी. इसके अलावा भारतीय सेना से जुड़े सवालों वाले क्विज़ भी क्विज में भी बच्चे भाग ले सकेंगे.

भारतीय सेना के बारे में जान सकेंगे लोग

भारतीय सेना के जवानों का शौर्य और दृढ़ संकल्प हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. भारतीय सेना के समृद्ध इतिहास और वीरता की झलक दिखाने के लिए आम लोगों को शॉर्ट फिल्म भी दिखाई जाएगी. इसके अलावा भारतीय सेना में शामिल होने की जानकारी समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों के बारे में भी आम जनता जान सकेगी.

क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

बता दें कि जनरल के.एम. करिअप्पा जो बाद में जनरल बने, उनकी याद में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है. साल 1949 में अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फेंसिस रॉय बुचर ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी. देश की स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के.एम. करिअप्पा बने थे. इस दिन को यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना की ओर से शिमला में यह खास आयोजन होने जा रहा है. इसके जरिए भारतीय सेना के लंबे और गौरवशाली इतिहास के बारे में समाज में जागरूकता बढ़ेगी.

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