संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल के कारण अयोग्य घोषित किए गए हिमाचल प्रदेश के विधायक जल्द पेंशन का अधिकार खो देंगे. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार, 1 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन अधिनियम) में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया.

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विधेयक में अधिनियम की धारा 6-बी में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है. इसमें कहा गया है, 'अधिनियम की धारा 6-बी के विपरीत किसी भी प्रावधान के बावजूद, 14वीं राज्य विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित कोई भी व्यक्ति, यदि उसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराया गया है, तो वह इस अधिनियम के तहत पेंशन का हकदार नहीं होगा.'

दलबदल को हतोत्साहित करने का प्रावधान नहीं

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मुख्यमंत्री सुखविंदर ने कहा कि यह संशोधन आवश्यक था क्योंकि वर्तमान अधिनियम में विधायकों के दलबदल को हतोत्साहित करने का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य इस संवैधानिक लक्ष्य को प्राप्त करना, जनादेश की रक्षा करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षित करना और संवैधानिक उल्लंघन को रोकना है.

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार, 1 अप्रैल को एक विधेयक पेश किया गया, जिसमें ऐसे किसी भी व्यक्ति को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है, जिसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत गंभीर अपराधों, विशेष रूप से 'चिट्टा' या हेरोइन व्यापार के लिए आरोप तय किए गए हैं.

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 का उद्देश्य आपराधिक तत्वों को पंचायती राज संस्थाओं में प्रवेश करने से रोककर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की शुचिता की रक्षा करना है.