Shimla News: साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है. हिमाचल प्रदेश में भी अपनी सियासी जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ नया अभियान छेड़ा है. हिमाचल आम आदमी पार्टी (आप) ने पार्टी के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर 'मोदी हटाओ, देश बचाओ' अभियान शुरू किया. इस अभियान के तहत आप के पदाधिकारी और कार्यकर्ता गली-मोहल्ले में जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पोस्टर लगा रहे हैं. राजधानी शिमला के लोअर बाजार से इसकी शुरुआत की गई. कार्यकर्ताओं ने लोअर बाजार के साथ लगते इलाके में जगह-जगह घूमकर प्रधानमंत्री के खिलाफ पोस्टर लगाए.

लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप

आप शिमला लोकसभा सीट के प्रभारी चमन राकेश आजटा ने कहा कि आज देश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. विपक्ष को संसद में बोलने का मौका नहीं दिया जाता. भारतीय जनता पार्टी की सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि सदन में आवाज उठाने वालों की सदस्यता रद्द करने का काम हो रहा है. विपक्षी नेताओं को ईडी और सीबीआई के जरिए डराने की कोशिश की जा रही है.

'आम आदमी पार्टी डरने वाली नहीं'

चमन राकेश आजटा ने कहा कि राहुल गांधी अडानी मामले में सरकार को घेर रहे थे. इसलिए उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रवैये को तानाशाह वाला करार दिया. आजटा ने कहा कि दिल्ली में भी आप के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज किए गए हैं. सरकार जितने मामले दर्ज करना चाहती है, उतने कर सकती है. आप किसी से डरने वाली नहीं है.

आप का कोई आधार नहीं- बीजेपी 

बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी करण नंदा ने कहा कि आम आदमी पार्टी का हिमाचल प्रदेश में कोई आधार नहीं है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आप ने सभी सीटों पर अपनी जमानत जब्त करवाने का काम किया. उन्होंने कहा कि आज पूरे देश के विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गोलबंद होने का काम कर रहे हैं. इससे अब पता चलता है कि देश में बेहतरीन शासन करने वाला मुखिया मजबूत और सशक्त व्यक्तित्व वाला है. लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी नए रिकॉर्ड के साथ एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. इससे विपक्ष को खुद जनता ही जवाब दे देगी.

'बेवजह मुद्दा बनाने की हो रही नाकाम कोशिश'

नंदा ने कहा कि राहुल गांधी की सदस्यता रद्द किए जाने के पीछे सरकार का कोई की कोई भूमिका नहीं है. राहुल गांधी ने चार साल पहले मोदी समाज के खिलाफ टिप्पणी की. इस टिप्पणी के में दर्ज हुए मामले में सूरत कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई. भारतीय संविधान में पीपल रिप्रेजेंटेशन एक्ट 1951 की धारा-8(4) के तहत राहुल गांधी पर कार्रवाई की गई. नियमों के मुताबिक राहुल गांधी की सदस्यता को रद्द हुई है. इसमें सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े करने का कोई औचित्य नहीं है. करण नंदा ने पूछा कि इससे पहले जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तार किया जा रहा था, तब तो कांग्रेस पार्टी चंद मिनट के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट से राहत लेकर आ गई. लेकिन, बात जब अपने नेता की थी तो कांग्रेस आखिर क्यों कोर्ट नहीं गई? उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास मोदी सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है. ऐसे में बेवजह की बातों को तूल देकर मुद्दा बनाने की नाकाम कोशिश की जा रही है.

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