हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त (पेंशन) विभाग ने एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन जारी किया है. इसमें 15 मई 2003 या उससे पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों पर भर्ती हुए कर्मचारियों को अब पुरानी पेंशन योजना (OPS)  का लाभ देने का निर्णय लिया गया है.  

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वित्त विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, राज्य सरकार ने इस श्रेणी के कर्मचारियों को केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत कवर किए जाने का अवसर प्रदान किया है. इसके साथ ही इसमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में जमा कर्मचारियों का अंशदान उनके जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) खाते में स्थानांतरित करने की बात भी कही गई है. यह निर्णय केंद्र सरकार के 3 मार्च 2023 के दिशा-निर्देशों और प्राप्त अभ्यावेदनों पर विचार करने के बाद लिया गया है.

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ज्ञापन में क्या कहा गया है?

ज्ञापन में कहा गया है कि पात्र कर्मचारी 31 अक्टूबर 2026 तक एकमुश्त विकल्प का प्रयोग कर सकेंगे. निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प न देने वाले कर्मचारी पहले से चुनी गई पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत ही बने रहेंगे. सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक बार दिया गया विकल्प अंतिम और अपरिवर्तनीय (Final and Irrevocable) होगा. पात्रता की जांच के बाद संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी मामलों पर निर्णय लेगा और आवश्यक आदेश 31 दिसंबर 2026 तक जारी किए जाएंगे. इसके बाद ऐसे कर्मचारियों के NPS खाते 28 फरवरी 2027 से बंद किए जाएंगे.

OPS चुनने पर GPF का सदस्य बनना होगा

ज्ञापन के अनुसार, OPS में शामिल होने वाले कर्मचारियों को सामान्य भविष्य निधि (GPF) की सदस्यता भी लेनी होगी. इसका मतलब है कि जो भी कर्मचारी OPS चुनेंगे उन्हें GPF का सदस्य बनना पड़ेगा. इसके साथ ही NPS खाते में जमा कर्मचारी और सरकारी अंशदान तथा उसपर मिला निवेश लाभ सरकार के तय नियमों के अनुसार ही समायोजन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी न हो. इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है जिनकी भर्ती प्रक्रिया 15 मई 2003 से पहले शुरू हुई थी, लेकिन नियुक्तियां बाद में हुईं और वे NPS के दायरे में आ गए थे.

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