हिमाचल प्रदेश विधानसभा का आगामी बजट सत्र इस बार ऐतिहासिक और हंगामेदार होने वाला है. प्रदेश के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब बजट सत्र की शुरुआत तो होगी, लेकिन मात्र तीन दिन की कार्यवाही के बाद ही उस पर 'ब्रेक' लग जाएगा. बजट पेश किए बिना ही सत्र स्थगित होगा और बाद में दूसरे चरण में बजट प्रस्तुत किया जाएगा. इस बार सत्र का मुख्य मुद्दा केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का बंद होना रहेगा, जिसकी गूंज सदन में सुनाई देना तय है.

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राज्यपाल की ना के बाद सरकार का फैसला

दरअसल, सुक्खू सरकार ने RDG के मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी, जिसे मंजूरी नहीं मिली. इसके बाद सरकार ने रणनीति बदलते हुए 16 से 18 फरवरी तक तीन दिन का बजट सत्र बुलाने का निर्णय लिया है.

स्पीकर बोले- RDG पर होगी चर्चा, बजट की तारीख अभी तय नहीं 

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने बताया कि सत्र के पहले चरण (16-18 फरवरी) की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी. इसके बाद सदन में RDG बंद होने से उत्पन्न हुई आर्थिक परिस्थितियों पर विशेष चर्चा होने की पूरी संभावना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी बजट पेश करने की तारीखें तय नहीं हुई हैं. सरकार जब बजट का पूरा खाका तैयार कर लेगी, उसके बाद ही तिथियों की घोषणा की जाएगी और सत्र को आगे बढ़ाया जाएगा.

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तैयारियां पूरी, सुरक्षा पर मंथन 

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च अधिकारियों के साथ बैठक भी की गई है. फिलहाल सरकार की ओर से तीन दिन का ही बिजनेस (कामकाज) प्राप्त हुआ है. विधायकों की तरफ से भी प्रश्न और प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं.

क्यों खास है यह सत्र? 

नियमों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में साल में कुल 35 बैठकें होनी चाहिए, जिनमें से आमतौर पर 20 दिन का बजट सत्र होता है. परंपरा रही है कि बजट सत्र के बीच में छुट्टियां (Recess) होती हैं, लेकिन वे बजट पेश होने के बाद होती हैं ताकि कमेटियां बजट की जांच कर सकें. लेकिन इस बार बजट पेश होने से पहले ही सत्र में ब्रेक लग रहा है, जो अपने आप में एक अनोखी घटना है.