हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक कॉलेज की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. मामला सामने आते ही परिजनों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. परिजनों का आरोप है कि छात्रा लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना और जातीय भेदभाव का शिकार थी, जिसके चलते वह डिप्रेशन में चली गई.
मोबाइल रिकॉर्डिंग ने खुला मामला
मामले की गंभीरता उस वक्त और बढ़ गई, जब छात्रा के मोबाइल फोन से उसकी मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया एक बयान सामने आया. इस रिकॉर्डिंग में छात्रा ने कॉलेज के एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं.
छात्रा का कहना है कि प्रोफेसर कक्षा और कॉलेज परिसर में उसके साथ अशोभनीय व्यवहार करता था और उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान करता था.
शारीरिक छेड़छाड़ और धमकाने के आरोप
रिकॉर्डिंग में छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों को छूने की कोशिश की और विरोध करने पर उसे डराया-धमकाया गया. रिकॉर्डिंग में छात्रा का यह भी कहना था कि जब उसने इस व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई, तो उसे जातीय आधार पर अपमानित किया गया और मानसिक दबाव बढ़ाया गया.
छात्र और दलित संगठनों में रोष
मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों, दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है. सभी ने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए आरोपी प्रोफेसर और कॉलेज प्रशासन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
भीम आर्मी के नेता रवि कुमार दलित ने कहा कि धर्मशाला कॉलेज की छात्रा के साथ जो हुआ वह बर्दाश्त से बाहर है. अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद आज छात्रा जिंदा होती.
संगठनों ने आरोपियों पर अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग उठाई है. इस बीच अशोक रतन ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है.