हरियाणा स्थित यमुनानगर के हथिनी कुंड बैराज पर जल संकट गहराता जा रहा है. बैराज का पानी लगातार घट रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश और वेस्टर्न जमुना कैनाल (WJC) को प्रयाप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पानी का स्तर घटने के कारण जलविद्युत परियोजना पर भी असर पड़ रहा है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो रही है. इस समय हथिनी कुंड बैराज पर पानी की आमद ऐतिहासिक रूप से बेहद कम दर्ज की गई है.

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यहां सिर्फ 2800 क्यूसिक पानी रिकॉर्ड किया गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है. इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश और वेस्टर्न जमना कैनाल पर पड़ रहा है, जिन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा. जल की कमी का असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है. हाइडल पावर प्रोजेक्ट पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां बिजली उत्पादन बाधित हो गया है. इससे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.

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पिछले साल की तूलना में कम है जल स्तर

हथिनी कुंड बैराज पर गहराते जल संकट वाली स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में लोगों को न केवल पानी की समस्या होने वाली है, बल्कि बिजली की कमी भी झेलनी पड़ सकती है. अगर पिछले साल की स्थिति से तुलना करें, तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी. मानसून सीजन के दौरान यहां लगभग 3 लाख 29 हजार क्यूसिक पानी दर्ज किया गया था, जो इस साल के मुकाबले कई गुना अधिक है.

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फ पिघलने से रात के समय जलस्तर में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी जरूर हो रही है, लेकिन यह बढ़ोतरी मौजूदा संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है. कुल मिलाकर, हथिनी कुंड बैराज पर घटता जलस्तर आने वाले दिनों में कृषि, पेयजल और बिजली तीनों क्षेत्रों के लिए चुनौती बन सकता है. अब सबकी नजरें मानसून पर टिकी है क्योंकि अब यही  हथिनी कुंड बैराज के जल संकट को दूर कर सकता है. 

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