पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन इस दर्दनाक घटना की टीस आज भी परिवार के दिलों में जिंदा है. शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के घर में वक्त जैसे ठहर सा गया है. एक फोन कॉल से मिली उस दुखद खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी थी. आज भी जब उस दिन को याद किया जाता है, तो घर का माहौल भारी हो जाता है. परिवार के लोग कहते हैं कि समय जरूर आगे बढ़ रहा है, लेकिन दिल उस दिन से आज तक बाहर नहीं निकल पाया है.

विनय की बहन सृष्टि नरवाल बताती हैं कि उस दिन की हर छोटी-बड़ी बात उन्हें आज भी साफ-साफ याद है. सुबह दादा और पिता ने विनय से फोन पर बात की थी. सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही देर बाद एक कॉल ने सब बदल दिया.

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सृष्टि कहती हैं कि वो आखिरी बातचीत आज भी कानों में गूंजती है. उनके मुताबिक, यह दर्द ऐसा है जो वक्त के साथ कम होने के बजाय अंदर ही अंदर और गहरा होता जा रहा है.

माता-पिता को संभालना सबसे मुश्किल- सृष्टि

सृष्टि के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने माता-पिता को संभालना है. वह कहती हैं कि एक बेटी के लिए यह देखना बहुत मुश्किल होता है कि उसके माता-पिता अपने बेटे के गम में टूट रहे हों.

सृष्टि ने कहा कि मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पाई, बस अब यही कोशिश रहती है कि वो अपना ध्यान रखें. परिवार अब कोशिश करता है कि साथ बैठकर विनय की अच्छी यादों को साझा किया जाए, ताकि उनका हौसला बना रहे और विनय की मौजूदगी हमेशा महसूस हो.

बचपन से था देश सेवा का सपना

सृष्टि बताती हैं कि विनय के दिल में देश सेवा का जज्बा बचपन से ही था. वह हमेशा सेना में जाने की बात करते थे और देश के लिए कुछ करने का सपना देखते थे. उनके लिए देश सबसे पहले था. उनका मानना है कि हर नागरिक को देश के लिए अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और एक बेहतर समाज बनाने में योगदान देना चाहिए.

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नाम पर संस्थान बने तो होगी सच्ची श्रद्धांजलि

सृष्टि नरवाल ने सरकार से अपील की है कि किसी मेडिकल या शैक्षणिक संस्थान का नाम विनय नरवाल के नाम पर रखा जाए. उनका कहना है कि यही उनके भाई के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. साथ ही उन्होंने बताया कि 1 मई को विनय के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे.

सृष्टि का कहना है कि आतंकवाद एक ऐसी समस्या है जो सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है. उन्होंने कहा कि इसे जड़ से खत्म करना जरूरी है, ताकि कोई और परिवार ऐसा दर्द न सहे. परिवार की यही उम्मीद है कि विनय की शहादत बेकार न जाए और देश में शांति और सुरक्षा और मजबूत हो.