हरियाणा के पानीपत निवासी हरपाल और उनके मित्र मुकेश सालों से गहरे दोस्त हैं. कांवड़ यात्रा में भी दोनों साथ निकले हैं. हरपाल स्कूटी चला रहे हैं, जबकि उनके दोस्त महेश साइड कार में बैठे नजर आते हैं. दोनों की यह जोड़ी राहगीरों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. लोग इन्हें देखकर शोले के जय और वीरू की दोस्ती से तुलना कर रहे हैं.

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हरपाल ने अपनी कांवड़ को बेहद अलग अंदाज में तैयार कराया है. इसके लिए उन्होंने करीब 1 लाख 10 हजार रुपये की विशेष साइड कार मुंबई से मंगाई, जिसे आने में लगभग छह महीने लगे. वहीं भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल मध्य प्रदेश से मंगवाया गया, जिसकी कीमत करीब 15 हजार रुपये बताई जा रही है. कांवड़ को आकर्षक बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली से कलाकारों को बुलाकर विशेष सजावट कराई.

कांवड़ को कंकाल और भूत-प्रेत की आकृतियों से सजाया

कांवड़ की सबसे खास बात इसकी थीम है. हरपाल ने इसे भोलेनाथ की बारात की झलक देने के लिए कंकाल और भूत-प्रेत की आकृतियों से सजाया है. मान्यता है कि भगवान शिव की बारात में हर प्रकार के गण शामिल होते हैं. इसी भाव को ध्यान में रखते हुए पूरी कांवड़ को अनोखा स्वरूप दिया गया है. रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट और अलग अंदाज के कारण यह कांवड़ दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है.

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शामली पहुंचते ही लोगों की कांवड़ देखने को उमड़ी भीड़

जैसे ही यह कांवड़ शामली के मंदिर हनुमान टिल्ला हनुमान धाम पर पहुंची, लोगों की भीड़ इसे देखने के लिए उमड़ पड़ी. राहगीर अपने मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो बनाने लगे. बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई इस अनोखी कांवड़ के साथ तस्वीरें खिंचवाने को उत्साहित दिखाई दिया. हरपाल का कहना है कि उनकी इच्छा थी कि भोलेनाथ की भक्ति के साथ ऐसा संदेश भी जाए, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखें. वहीं महेश का कहना है कि दोस्ती और आस्था, दोनों का यह सफर उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव है.

आस्था, दोस्ती और अनोखी कला का यह संगम कांवड़ यात्रा में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. हरपाल और मुकेश की जोड़ी यह संदेश देती है कि जब सच्ची दोस्ती और भोलेनाथ की भक्ति साथ हो, तो हर सफर यादगार बन जाता है.

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