हरियाणा के गुरुग्राम में एक कपल ने IVF सेंटर पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया है. DNA टेस्ट में बच्चे के माता-पिता होने की पुष्टि नहीं होने के बाद दंपति ने सनसनीखेज शिकायत दर्ज कराई है. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज हुई, लेकिन अगले ही दिन जांच पर रोक लगा दी गई. 

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राहुल राठौर नामक शिकायतकर्ता ने बताया कि 13 फरवरी 2025 को उनके एग और सीमेन लिए गए थे. 14 मई को एम्ब्रियो वापस ट्रांसफर किया गया. 5 जनवरी 2026 को बच्चे पैदा हुए. छोटे बच्चे का चेहरा परिवार के किसी सदस्य से मिलता-जुलता नहीं था. शक होने पर दंपति ने DNA टेस्ट करवाया, जिसमें मां और पिता दोनों की पुष्टि नहीं हुई.

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5-6 लाख खर्च करने के बाद भी न्याय नहीं मिला

राहुल राठौर ने बताया, “इतने इंजेक्शन, टेस्ट और 5-6 लाख रुपये का बिल भरने के बाद भी अगर बच्चा हमसे मैच नहीं कर रहा था तो हम दूसरा टेस्ट क्यों नहीं करवाते?” दंपति ने 3 महीने तक पुलिस और अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई. आखिरकार कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज हुई, लेकिन अगले दिन ही जांच पर रोक लगा दी गई. 

DNA रिपोर्ट में मिसमैच, सेंटर पर लगे गंभीर आरोप

दंपति का आरोप है कि IVF सेंटर में जानबूझकर बच्चा बदल दिया गया. उन्होंने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही और पक्षपात का भी आरोप लगाया है. राहुल राठौर ने कहा कि वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और बच्चे की सही पहचान व दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं. 

यह मामला IVF सेंटर्स में पारदर्शिता, सुरक्षा प्रोटोकॉल और एम्ब्रियो हैंडलिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है. गुरुग्राम पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज तो कर ली, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर रोक लगने से पीड़ित परिवार निराश है. दिल्ली-NCR में IVF सेंटर्स की बढ़ती संख्या के बीच यह घटना चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता और जवाबदेही पर बहस छेड़ सकती है. पीड़ित दंपति अब उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी में है.

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