हरियाणा के फरीदाबाद में 16 तारीख को एक केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान दो फायरकर्मी—साथी रणबीर सिंह और साथी भगवत शर्मा—ड्यूटी निभाते हुए शहीद हो गए. इस दुखद घटना के बाद सर्व कर्मचारी संघ और संबंधित संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए गए.
सभा में राज्य उप-प्रधान कश्मीर सिंह ने कहा कि एक तरफ सरकार फायर कर्मचारियों के प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री मीडिया में फायरकर्मियों पर गैर-गंभीर टिप्पणियां करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को न तो पक्का किया जा रहा है और न ही आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं.
पुराने उपकरणों के सहारे जान हथेली पर रखकर ड्यूटी
संगठन के नेताओं का कहना है कि फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण और बेहतर संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते. कई गाड़ियां पुरानी हैं और उपकरण भी ठीक ढंग से काम नहीं करते. इसके बावजूद कर्मचारी सैनिकों की तरह दिन-रात जनता और सरकारी तंत्र की सुरक्षा में जुटे रहते हैं. सभा में बताया गया कि फायर सेवा का कार्य अत्यंत जोखिम भरा होता है. अक्सर आग बुझाने के दौरान हादसे होते रहते हैं, लेकिन सरकार ने अब तक जोखिम भत्ता (रिस्क अलाउंस) जैसी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया.
शहीद दर्जा और मुआवजे की मांग
संगठन ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि शहीद हुए दोनों फायरकर्मियों को 'शहीद' का दर्जा दिया जाए, उनके परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक-एक सरकारी नौकरी दी जाए. साथ ही घायल कर्मचारियों को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए. दमकल अधिकारी अमित ने कहा कि दिल्ली में शहीद फायरकर्मियों को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी जाती है, और हरियाणा में भी ऐसी ही व्यवस्था लागू होनी चाहिए.
प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन
नरेश कुमार प्रधान नगर निगम ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा के बाद प्रदर्शन करते हुए डीसी को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई. तीन अलग-अलग ज्ञापन—नगरपालिका, फायर ब्रिगेड और CITU (सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित संगठन) की ओर से दिए जाएंगे. CITU नेताओं ने आरोप लगाया कि IOCL में चल रही लंबी हड़ताल को प्रशासन दबाने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगें नहीं मानीं, तो 8 और 9 अप्रैल को सफाई कर्मचारी, सीवरमैन, माली और फायर विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे.
स्थाई रोजगार और नई भर्तियों की मांग
संगठन ने यह भी मांग की कि जो कर्मचारी 10-15 वर्षों से अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं, उन्हें नियमित किया जाए. फायर विभाग को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और कर्मचारियों को पक्का कर जॉब सिक्योरिटी दी जाए.
‘फायर सेवा भी सेना की तरह’
वक्ताओं ने कहा कि फायर ब्रिगेड की सेवा सेना की तरह है, जहां कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की रक्षा करते हैं. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए. अंत में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगामी दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
