हरियाणा के अंबाला में इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. पुलिस ने गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे सिख समुदाय के सदस्यों को तितर-बितर करने के लिए बल तैनात किया. 

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ये लोग अंतरराष्ट्रीय खालिस्तानी आतंकवाद विरोधी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. इस दौरान पुलिस और लोगों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली है. इसमें कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई है.

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अंबाला एसपी ने मामले पर क्या कहा?

अंबाला एसपी अजीत सिंह शेखावत ने मामले पर बताया, "राजमार्ग को खाली कराने के लिए बल प्रयोग किया गया. हमारे एक डीएसपी पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया. उनका हाथ कट गया और अंगूठा भी कटने की कगार पर है. इसलिए राजमार्ग को खाली कराने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा. हमने उनसे कई दौर की बातचीत की, लेकिन उन्होंने कोई समाधान नहीं दिया और जानबूझकर यहां विरोध प्रदर्शन को लंबा खींचने की कोशिश की. हमने बार-बार उनसे नाकाबंदी हटाने का आग्रह किया." 

उन्होंने आगे बताया, "भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवी भाले, कुल्हाड़ी, तलवार और अन्य हथियारों से लैस थे. अंधेरा होते ही उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला करना शुरू कर दिया और जाम को हटाने से रोकने के लिए कुछ ट्रकों की चाबियां छीन लीं, जिससे साफ पता चलता है कि वे पूरी रात अराजकता फैलाना चाहते थे. पुलिस पर हमले शुरू होते ही हमें मजबूरन इलाका खाली कराना पड़ा. 

पांच-छह जवान घायल- एसपी

एसपी ने बताया कि हमारे पांच-छह जवान घायल हुए हैं. उन्हें अस्पताल ले जाया गया है और उनका इलाज चल रहा है, जबकि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. उन्होंने जाम में फंसे एक गैस टैंकर के चालक से चाबियां छीन लीं और बार-बार धमकी दी और गड़बड़ी पैदा करने का इरादा था. 

एसपी ने कहा, "हमने उन्हें कई बार टैंकर को रास्ता देने का आग्रह किया ताकि संभावित दुर्घटना को रोका जा सके, लेकिन बदमाशों ने जानबूझकर ड्राइवर की चाबियां छीन लीं, उन्हें लेकर भाग गए और ड्राइवर को धमकाकर घटनास्थल से भगा दिया. हम निश्चित रूप से इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान करेंगे और एफआईआर दर्ज करेंगे."

घटना पर क्या बोले डीजीपी?

घटना पर डीजीपी अजय सिंघल ने बताया, "गुरुवार (13 अगस्त) की सुबह करीब 1,500 से 1,600 सिख पंजोखरा गुरुद्वारे में इकट्ठा हुए. वे पहले दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में कार्रवाई की मांग कर रहे थे. हमारी उनसे बातचीत चल रही थी, तभी अचानक कुछ लोगों ने राजमार्ग जाम कर दिया. हमने इस दौरान संयम बरता और उनसे बातचीत जारी रखी. हमने उनकी मांगें भी मान लीं." 

डीजीपी ने बताया, "हालांकि, जब यातायात जाम गंभीर हो गया और जनता को परेशानी होने लगी, तो अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई. परिणामस्वरूप, पुलिस को सड़क खाली कराने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. इस दौरान हमारे कई जवान घायल हो गए. एक डीएसपी के घुटने में चोट आई, और तीन-चार अन्य को सिर में चोटें आईं." 

उन्होंने बताया कि मामूली रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई, लेकिन हमारे चार-पांच जवान अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. हम निश्चित रूप से मामला दर्ज करेंगे और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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