गुजरात हाई कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे नारायण साई की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 2001 के रेप केस में आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया था. सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ नारायण साई की अपील हाई कोर्ट में लंबित है.
सोमवार, 4 मई को पारित एक आदेश में जस्टि इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वच्छानी की बेंच ने साई की याचिका को खारिज कर दिया. पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए, "हमारे लिए प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है कि आवेदक-दोषी को (अपीलीय न्यायालय से) बरी होने का उचित मौका है."
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नारायण साई ने नहीं किया था सुनवाई में सहयोग
बेंच ने कहा, "...इसलिए गुण-दोष के आधार पर, हमें सजा के निलंबन और जमानत देने के संबंध में कोई पर्याप्त आधार नहीं मिलता है." हाई कोर्ट ने कहा कि हालांकि साई 11 साल जेल की सजा काट चुका है लेकिन उसने 2019 से अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया है. उसने कई बार याचिका दायर कर अस्थायी या स्थायी जमानत पाने की कोशिश की है.
2019 में मिली थी आजीवन कारावास की सजा
अदालत ने कहा कि उसे अपनी अपील की शीघ्र सुनवाई में दिलचस्पी नहीं थी और उसने कार्यवाही में देरी के लिए कई हथकंडे अपनाए. साल 2013 में एक पूर्व महिला भक्त ने साई के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया था और अप्रैल 2019 में सूरत की एक अदालत ने उसे मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बाद से नारायण साईं कई बार पैरोल या फर्लो पर जेल से बाहर आया है.
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