गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट सौंप दी.

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सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मसौदे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे अहम मुद्दों पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा सुझाया गया है. इसका मकसद अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जो सब पर बराबर लागू हो.

महिलाओं के अधिकार पर खास फोकस

रिपोर्ट में महिलाओं के अधिकार और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि कानून ऐसा हो, जिससे महिलाओं को बराबरी का हक मिले और उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न हो.

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समिति ने मसौदा तैयार करते समय गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को भी ध्यान में रखा है. यानी कोशिश की गई है कि प्रस्तावित कानून राज्य के अलग-अलग समुदायों और परंपराओं के साथ संतुलन बनाए रखे.

तीन खंडों में सौंपी गई रिपोर्ट

सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने गांधीनगर में मुख्यमंत्री को यह रिपोर्ट सौंपी. यह रिपोर्ट तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है, जिसमें विस्तृत सुझाव और कानूनी ढांचा शामिल है.

इस समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को शामिल किया गया था, ताकि मसौदा संतुलित और व्यावहारिक बन सके. इसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सीएल मीणा, वरिष्ठ अधिवक्ता आर.सी. कोडेकर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल रहे.

इन सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव के आधार पर सुझाव दिए, जिससे रिपोर्ट को व्यापक और मजबूत रूप दिया जा सका. समिति ने कानून, प्रशासन, शिक्षा और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया.

अब सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. अगर यह लागू होता है, तो गुजरात देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां यूसीसी को लेकर ठोस कदम उठाए गए हैं.