गुजरात में जेतपुर, धोराजी और उपलेटा पंथक में आज (शुक्रवार, 9 जनवरी) सुबह भूकंप के लगातार झटकों से लोगों में दहशत फैल गई. इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR) के अनुसार, पिछले 12 घंटों में इस क्षेत्र में कुल 7 भूकंपीय झटके दर्ज किए गए हैं.

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ISR के डेटा के मुताबिक, सबसे पहले बीती रात 8:43 बजे रिक्टर स्केल पर 3.3 तीव्रता का झटका महसूस किया गया, जिसका केंद्र उपलेटा से लगभग 30 किलोमीटर दूर था. इसके बाद आज तड़के सबसे तेज झटका सुबह 6:19 बजे दर्ज हुआ, जिसकी तीव्रता 3.8 रही.

सुबह 6:19 से 8:34 बजे तक दर्ज झटके इस प्रकार हैं:

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सुबह 06:19 बजे – 3.8 तीव्रतासुबह 06:56 बजे – 2.9 तीव्रतासुबह 06:58 बजे – 3.2 तीव्रतासुबह 07:10 बजे – 2.9 तीव्रतासुबह 07:13 बजे – 2.9 तीव्रतासुबह 07:33 बजे – 2.7 तीव्रतासुबह 08:34 बजे – फिर से हल्का झटका महसूस किया गया

जानकारी के अनुसार, इन सभी झटकों का केंद्र मुख्य रूप से उपलेटा से 27 से 30 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व (ENE) दिशा में रहा. भूकंप की गहराई जमीन से 6.1 किलोमीटर से 13.6 किलोमीटर के बीच मापी गई है.

जान-माल का कोई नुकसान नहीं

गनीमत रही कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार झटकों के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए और भय का माहौल बना रहा. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

धोराजी में स्कूलों में छुट्टी का फैसला

लगातार भूकंप के झटकों के चलते राजकोट जिले के धोराजी शहर में कई निजी स्कूलों के संचालकों ने एहतियातन आज अवकाश घोषित कर दिया. विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया. जो बच्चे सुबह स्कूल पहुंच चुके थे, उन्हें भी वापस घर भेज दिया गया.

भूकंप के लिहाज से गुजरात संवेदनशील राज्य

जानकारी के लिए बता दें कि गुजरात में भूकंप ज्यादा आने के कई मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं. गुजरात कई भूकंपीय फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिनमें कच्छ फॉल्ट, कट्रोल हिल्स फॉल्ट और नलिया फॉल्ट शामिल हैं. इन फॉल्ट्स पर धरती की प्लेटों में लगातार तनाव बनता रहता है, जो टूटने पर भूकंप के रूप में निकलता है.

इसके अलावा, भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट का दबाव भी इसका मुख्य कारण है. भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकते हुए यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है. इस टकराव का असर सिर्फ हिमालय तक सीमित नहीं है, बल्कि कच्छ और गुजरात क्षेत्र तक फैला हुआ है. 

वहीं, कच्छ क्षेत्र एक 'रिफ्ट जोन' भी है. कच्छ का रण भूवैज्ञानिक रूप से एक पुराना रिफ्ट जोन है. ऐसे क्षेत्रों में जमीन पहले से कमजोर होती है, इसलिए वहां हल्के से मध्यम भूकंप बार-बार आते हैं.