गुजरात शिक्षा विभाग ने अहमदाबाद के ‘सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल’ पर अब शिक्षा विभाग का बड़ा ऐक्शन देखने को मिल सकता है. स्कूल को विभाग की ओर से दसवीं कक्षा के छात्र की चाकू मार कर हत्या करने के मामले में गंभीर लापरवाही बरतने पर नोटिस भेजा है. 

अधिकारियों का कहना है कि स्कूल ने न तो छात्र को समय पर चिकित्सा सहायता दिलाई और न ही घटना की सूचना दी. जिला शिक्षा अधिकारी ने सवाल उठाया है कि क्यों न स्कूल की मान्यता और ICSE बोर्ड से संबद्धता के लिए दी गई NOC रद्द कर दी जाए.

गेट नंबर तीन के पास बैठा रहा छात्र

चाकूबाजी की यह घटना 19 अगस्त को शहर के खोखरा इलाके में स्थित स्कूल के मुख्य द्वार के पास हुई थी. पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने स्कूल के बाहर छात्र पर हमला किया और घायल होने के बाद छात्र गेट नंबर तीन के पास बैठा रहा, जहां उसने अपने हाथ से खून रोकने की कोशिश की.

घटना की जानकारी तब सामने आई जब एक सुरक्षा गार्ड ने उसे देखकर स्कूल प्रबंधन को सूचित किया. इसके बाद छात्र को पहले एलजी अस्पताल और फिर एसवीपी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. खोखरा पुलिस को भी इस घटना के बारे में तब पता चला जब अस्पताल में तैनात एक पुलिसकर्मी ने जानकारी दी.

शिक्षा विभाग ने नोटिस में क्या कहा?

घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने शनिवार (23 अगस्त) को स्कूल को नोटिस जारी किया. नोटिस में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन ने न तो घटना की जानकारी अधिकारियों को दी और न ही 19 अगस्त को भेजे गए पहले नोटिस का जवाब दिया.

डीईओ ने लिखा, “यह आपकी ओर से गंभीर लापरवाही और उदासीन दृष्टिकोण को दर्शाता है.” उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा अधिकारी को घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली. 

नोटिस में पूछा गया है कि ICSE संबद्धता के लिए दी गई NOC और मान्यता क्यों न रद्द की जाए. स्कूल को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का समय दिया गया है, अन्यथा यह माना जाएगा कि प्रबंधन के पास कुछ कहने के लिए नहीं है और उचित कार्रवाई की जाएगी.

स्कूल के प्रिंसिपल पर लापरवाही का मामला दर्ज

इस मामले में अहमदाबाद अपराध शाखा ने 22 अगस्त को स्कूल के प्रिंसिपल जी इमैनुएल पर मामला दर्ज किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने घातक घटना की सूचना समय पर संबंधित अधिकारियों को नहीं दी. पुलिस ने बताया कि पीड़ित छात्र के पेट पर गहरा घाव था और खून काफी बह चुका था, जिससे उसकी मौत हो गई. 

एसीपी भरत पटेल ने कहा कि यह घटना स्कूल सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है. यह मामला राज्य में शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की सख्ती की ओर इशारा करता है.