पश्चिमी दिल्ली के नारायणा गांव में रहने वाले लोग इन दिनों पार्किंग की बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें अपने घरों के आसपास वाहन खड़े करने की जगह नहीं मिल रही और मजबूरी में दो किलोमीटर दूर खुले मैदानों में गाड़ियां छोड़नी पड़ रही हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि घर से इतनी दूरी पर वाहन खड़े करने से न सिर्फ चोरी का खतरा बना रहता है, बल्कि गलत जगह पार्किंग के चलते चालान कटने की आशंका भी बनी रहती है. इस समस्या ने रोजमर्रा की जिंदगी को काफी मुश्किल बना दिया है.
डीडीए की कार्रवाई से बढ़ी दिक्कतें
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने गांव के पास मौजूद खाली जमीन को अचानक दीवार बनाकर घेर दिया और वहां ताला लगाकर प्रवेश बंद कर दिया. इसी के बाद से पार्किंग की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है. लोगों ने बताया कि वर्षों पहले जब डीडीए ने गांव की जमीन अधिग्रहित की थी, तब विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए थे. यहां तक कि राज्यसभा में भी सैकड़ों बीघा जमीन लेने की जानकारी दी गई, लेकिन आज उसी गांव के लोग अपनी गाड़ियों के लिए जगह खोजने को मजबूर हैं.
अस्थायी पार्किंग के नियम पर भी अटका मामला
स्थानीय निवासियों के अनुसार 5 जनवरी से डीडीए ने एक प्रावधान लागू किया है, जिसके तहत खाली जमीन को अस्थायी पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. गांव के लोगों ने इसके लिए आवेदन भी किया है, लेकिन अभी तक जमीन नहीं खोली गई है. लोगों का कहना है कि अब स्थिति यह है कि वाहन दूर खड़ा कर पैदल घर लौटना पड़ता है. अचानक दीवार खड़ी कर एंट्री बंद कर देने से लोगों को रोजाना भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.
25 साल पुरानी व्यवस्था टूटी, सड़क पर उतरे लोग
स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 25 वर्षों से लोग इसी जगह पर गाड़ियां खड़ी करते आ रहे थे. तब न चोरी का डर था और न चालान की चिंता. अब हजारों ग्रामीण इस संकट से प्रभावित हैं, जिसके चलते सभी लोग एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि उनकी समस्या सरकार तक पहुचें और जल्द से जल्द इसका समाधान निकल सके.
