राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपशिष्ट प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की गई है. दिल्ली के महापौर सरदार राजा इक़बाल सिंह ने “दिल्ली मलबा पोर्टल” की शुरुआत की है. यह उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट यानी मलबे के संग्रहण, परिवहन और उचित निस्तारण को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है.

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इस अवसर पर दिल्ली नगर निगम के आयुक्त संजीव खिरवार समेत एमसीडी और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने इस पहल को राजधानी में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम

नया डिजिटल पोर्टल निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देगा. इससे अवैध रूप से मलबा फेंकने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी. साथ ही यह व्यवस्था राजधानी को आगामी सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2025 के लिए तैयार करेगी, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले हैं.

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क्यूआर कोड से मलबा उठाने का अनुरोध

इस पोर्टल के जरिए आम नागरिक, बिल्डर, ठेकेदार या सरकारी एजेंसियां आसानी से मलबा उठाने के लिए अनुरोध दर्ज कर सकेंगी. इसके लिए सरल ऑनलाइन इंटरफेस के साथ क्यूआर कोड की सुविधा भी दी गई है. दिल्ली नगर निगम इस क्यूआर कोड के व्यापक प्रचार के लिए मीडिया अभियान भी चलाएगा.

पंजीकरण के बाद तय प्रक्रिया से होगा निस्तारण

पोर्टल पर अनुरोध दर्ज होने के बाद उसे पैनल में शामिल अधिकृत परिवहनकर्ताओं से जोड़ा जाएगा. ये परिवहनकर्ता मलबे को अधिकृत सीएंडडी संग्रह केंद्रों या उसकी मात्रा के आधार पर सीधे रीसाइक्लिंग प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था करेंगे. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य होगी, जिससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगे और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा मिलेगा.

कचरे से बनेगा निर्माण कार्य के लिए उपयोगी एग्रीगेट

इस पहल के जरिए निर्माण और विध्वंस कचरे को रीसाइक्लिंग के बाद निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले एग्रीगेट्स के रूप में पुनः उपयोग किया जा सकेगा. इससे सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी कम होगा.

स्वच्छ और हरित दिल्ली के लिए मजबूत प्रतिबद्धता: महापौर

एबीपी लाइव को जानकारी देते हुए दिल्ली के महापौर सरदार राजा इक़बाल सिंह ने कहा कि यह पोर्टल केवल एक तकनीकी साधन नहीं बल्कि स्वच्छ और हरित दिल्ली के निर्माण की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता है. उन्होंने कहा कि मलबा प्रबंधन को डिजिटाइज करके नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास में भागीदारी के लिए सशक्त बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अवैध रूप से मलबा फेंके जाने से सड़कों और नदियों पर जो दबाव पड़ता है, यह पहल उसे कम करने में मदद करेगी और राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी.

समस्या होने पर टोल-फ्री नंबर पर संपर्क की सुविधा

महापौर ने आगे बताया कि किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए नागरिक दिल्ली नगर निगम के टोल-फ्री नंबर 155305 पर संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि निगम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है.

शहरीकरण की चुनौती से निपटने का प्रभावी समाधान: आयुक्त

दिल्ली नगर निगम के आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण दिल्ली में प्रतिदिन हजारों टन निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट पैदा होता है. मलबा पोर्टल इस चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है. इससे जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेगी तथा धूल प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, जो सर्दियों के दौरान स्मॉग की समस्या को और गंभीर बना देता है.

स्मार्ट प्रशासन और भविष्य के नियमों के लिए तैयारी

आयुक्त ने कहा कि यह पहल अनियमित मलबा फेंकने से होने वाले अतिक्रमण को भी रोकेगी और दिल्ली नगर निगम को स्मार्ट प्रशासन के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी. इसके साथ ही यह पोर्टल शहर को 2025 के नियमों के तहत ट्रेसबिलिटी, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व और रीसाइक्लिंग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तैयार करेगा.

उन्नत तकनीक के साथ विकसित हुआ डिजिटल प्लेटफॉर्म

यह पोर्टल ट्रेस रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ रणनीतिक सहयोग में विकसित किया गया है. इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में रियल-टाइम ट्रैकिंग, स्वचालित सूचनाएं और एमसीडी की निगरानी के लिए एनालिटिक्स डैशबोर्ड जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं.

भविष्य में और सेवाएं जोड़ने की तैयारी

नियामकीय अनुपालन और डिजिटल ट्रेसबिलिटी में विशेषज्ञता रखने वाली यह कंपनी उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर पोर्टल को लगातार बेहतर बनाएगी. भविष्य में इसमें योजना स्वीकृति, उपयोग निगरानी और नियामकीय रिपोर्टिंग जैसी सुविधाओं को भी एकीकृत करने की योजना है.